
Bhagalpur Land Dispute: बिहार के भागलपुर से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ जमीन के एक पुराने विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। झंडापुर थाना क्षेत्र में हुई इस घटना में चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। यह पूरा मामला पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
भागलपुर जिले के झंडापुर थाना क्षेत्र के हरियो गांव में यह दुखद घटना घटी है। इस Bhagalpur Land Dispute में उदय पासवान (पिता स्वर्गीय बेचू पासवान) समेत चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि यह जमीन विवाद सालों से चला आ रहा है और 2009 से ही न्यायालय में इसका टाइटल सूट लंबित है। इसके बावजूद, विपक्षी पक्ष लगातार विवादित जमीन पर कब्जा करने की फिराक में रहता है।
कैसे हुआ Bhagalpur Land Dispute का खूनी खेल?
मिली जानकारी के अनुसार, कुछ लोग जबरन उदय पासवान की पुश्तैनी जमीन पर पहुंच गए और वहां खंभे-खूंटी गाड़कर काम शुरू करने लगे। जब उदय पासवान ने इसका विरोध किया, तो लगभग 6-7 लोगों ने मिलकर उन पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। इस दौरान उदय पासवान सहित चार लोग बुरी तरह घायल हो गए। स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को किसी तरह नियंत्रित किया गया, लेकिन तब तक घायलों को काफी गंभीर चोटें आ चुकी थीं।
पुलिस पर लापरवाही का आरोप, न्याय की गुहार
घटना के बाद सभी घायल झंडापुर थाना पहुंचे, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने तत्काल कोई इंजरी रिपोर्ट या प्राथमिक कागजी कार्रवाई नहीं की। उन्हें सीधे मायागंज अस्पताल जाने की सलाह दी गई, जहाँ वर्तमान में सभी घायलों का इलाज चल रहा है। इस पर पीड़ित पक्ष ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ गहरी नाराजगी व्यक्त की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। पीड़ित परिवार का कहना है कि जब जमीन विवाद पहले से ही न्यायालय में लंबित है, तो विपक्षी पक्ष कानून को हाथ में लेकर जबरन कब्जा कैसे कर सकता है?
इस घटना ने एक बार फिर क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और भूमि विवादों को लेकर प्रशासनिक सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित पक्ष ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। यह जमीन विवाद केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि ऐसे कई मामलों की बानगी है जहाँ न्याय का इंतजार लंबा होता जा रहा है।
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