
Manjusha Mahotsav: जब कला की धरती पर संस्कृति के बादल घुमड़ते हैं, तो परंपराओं का उत्सव मनता है। भागलपुर के ऐतिहासिक सैंडिस कंपाउंड में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जहां तीन दिवसीय महोत्सव का भव्य आगाज हुआ।
Manjusha Mahotsav का भव्य उद्घाटन और संगीत संध्या
भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड स्थित मुक्त आकाश स्टेडियम में तीन दिवसीय मंजूषा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इस भव्य आयोजन का विधिवत उद्घाटन जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, डीडीसी प्रदीप कुमार और कला-संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन के तुरंत बाद एक संगीत संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के जाने-माने कलाकारों ने अपनी सुरीली प्रस्तुतियों से पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया।
लोकगाथा की मार्मिक प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
महोत्सव के पहले दिन की शाम का मुख्य आकर्षण कृष्णा क्लब के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत अंग जनपदीय लोकधरोहर पर आधारित नाटक रहा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कलाकारों ने मंजूषा कला की आत्मा कही जाने वाली लोकगाथा ‘बिहुला-विषहरी’ का जीवंत मंचन किया। इस नाटक में कलाकारों के सशक्त अभिनय और प्रभावशाली संवाद अदायगी ने वहां मौजूद सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
नाटक में विभिन्न किरदारों ने अपनी छाप छोड़ी। चांदो सौदागर की भूमिका में निभाष चंद्र मोदी, भगवान शिव के रूप में अजय अटल, मां मनसा के किरदार में संजना कुमारी, बिहुला के रूप में माधवी चौधरी और सोनिका के रूप में राधिका ने अपने अभिनय से जान डाल दी। वहीं, शितांशु अरुण ने डोम की भूमिका में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। पूर्णिमा, पिट्टू, आस्था और अन्य सह-कलाकारों के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने भी खूब तालियां बटोरीं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
अधिकारियों ने की कलाकारों की सराहना, DM ने की अपील
कार्यक्रम में मौजूद डीडीसी प्रदीप कुमार और कला-संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने इस ‘बिहुला-विषहरी’ नाटक की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कलाकारों के प्रयास को सराहनीय बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन क्षेत्रीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इससे हमारी नई पीढ़ी अपनी गौरवशाली लोक परंपराओं से जुड़ती है।
वहीं, जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने शहर के लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे बड़ी से बड़ी संख्या में महोत्सव में हिस्सा लें और अंग क्षेत्र की इस अनमोल लोक कला मंजूषा को प्रोत्साहित करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि मंजूषा कला भागलपुर की पहचान है और इसका संरक्षण व संवर्धन हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। आगामी दो दिनों में भी इस Manjusha Mahotsav में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।


