
Sidhu Moose Wala murder bail: संगीत की दुनिया में एक चमकता सितारा अचानक ढल गया, और उसके गुनाहगारों को अब न्याय की दहलीज पर जमानत मिल रही है। यह मामला सिर्फ एक कलाकार की हत्या का नहीं, बल्कि पंजाब की अपराध गाथा का एक काला अध्याय है, जिसमें अब नया मोड़ आया है।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बहुचर्चित पंजाबी गायक और रैपर सिद्धू मूसेवाला की 2022 में हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में आरोपी पवन बिश्नोई और जगतर सिंह की जमानत मंजूर कर ली है। यह लगभग दो साल पुराने इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। पवन बिश्नोई की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभय कुमार ने बताया कि आरोप था कि गोल्डी बराड़ ने उनके मुवक्किल (पवन बिश्नोई) को बोलेरो गाड़ी का इंतजाम करने के लिए कहा था, जिसका इस्तेमाल हत्यारों ने सिद्धू मूसेवाला की हत्या के लिए किया। उन पर इस आपराधिक साजिश का हिस्सा होने का भी आरोप था। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से उन्हें अंतरिम राहत मिली है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह सनसनीखेज वारदात 29 मई, 2022 को हुई थी, जब शुभदीप सिंह सिद्धू के नाम से जाने जाने वाले सिद्धू मूसेवाला की पंजाब के मानसा जिले के जवाहरके गांव में दिनदहाड़े बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना राज्य सरकार द्वारा उनकी सुरक्षा कम किए जाने के ठीक एक दिन बाद घटी थी। ‘295’ जैसे हिट गानों और कांग्रेस में अपनी बढ़ती राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए जाने जाने वाले 28 वर्षीय कलाकार अपनी महिंद्रा थार एसयूवी में दो सहयोगियों के साथ यात्रा कर रहे थे, तभी उन पर 19 गोलियां दागी गईं। अस्पताल ले जाते समय कुछ ही मिनटों में उनकी मृत्यु हो गई; उनके साथी घायल अवस्था में बच गए।
कनाडा स्थित गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने सोशल मीडिया के माध्यम से तुरंत इस हमले की जिम्मेदारी ली थी। उसने दावा किया कि यह 2021 में अकाली नेता विक्की मिद्दुखेड़ा की हत्या का बदला था, जिनका कथित तौर पर मूसेवाला के गिरोह से संबंध था। यह घटना गैंगस्टरों की आपसी दुश्मनी, जबरन वसूली की धमकियों और पंजाब के अंडरवर्ल्ड के झगड़ों के बीच घटी थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
Sidhu Moose Wala murder bail: हत्याकांड के आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में जेल में बंद गिरोह के सरगना लॉरेंस बिश्नोई के रिश्तेदार पवन बिश्नोई और जगतर सिंह भी शामिल थे, जिन्हें आरोपपत्र में हमलावरों और साजिशकर्ताओं में सूचीबद्ध किया गया। पुलिस ने आरोप लगाया कि वे एके राइफलों और अत्याधुनिक निगरानी उपकरणों की मदद से किए गए समन्वित हमले में सीधे तौर पर शामिल थे। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया और एक व्यापक जांच के दौरान तीन साल से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रखा गया। इस जांच में 30 से अधिक संदिग्धों को पकड़ा गया, सचिन थापन जैसे लोगों को अजरबैजान से प्रत्यर्पित किया गया, और यहां तक कि जेल के भीतर हुई हिंसा में कुछ अन्य आरोपियों की जान भी चली गई।
जांच और कानूनी प्रक्रिया: एक लंबा सफर
2024 में मानसा की एक अदालत ने लॉरेंस बिश्नोई और 26 अन्य लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 120बी (षड्यंत्र) और शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन सहित कई आरोप तय किए थे। हालांकि, लंबी हिरासत और मुकदमे में हो रही देरी को देखते हुए, पवन बिश्नोई और जगतर सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की। उनकी याचिका को पिछली रिहाई और जांच में हुई प्रगति के आधार पर स्वीकार कर लिया गया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें जमानत मिली। लॉरेंस बिश्नोई गिरोह से जुड़े इस मामले में आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







