
बाढ़ कटाव: भागलपुर के फरका पंचायत में बाढ़ से पहले कटाव रोकने का काम धीमी गति से चल रहा है, लेकिन अब यह काम पूरी तरह ठप पड़ा है। अधिकारी नदारद हैं और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। हर साल गंगा नदी सैकड़ों घरों को लील जाती है, और इस बार भी हालात बदतर दिख रहे हैं।
बाढ़ कटाव को लेकर ग्रामीणों में गुस्सा
भागलपुर के सबौर प्रखंड स्थित फरका पंचायत में हर साल बाढ़ और कटाव से भारी तबाही मचती है। बाढ़ आने से पहले कटावरोधी कार्य शुरू किया गया था, ताकि गंगा के कटाव को रोका जा सके। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि काम में भारी गड़बड़ी और सुस्ती बरती जा रही है, और अब तो कार्य पूरी तरह बंद कर दिया गया है। मौके पर कोई अधिकारी भी मौजूद नहीं है, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है।
हर साल बाढ़ में गंगा किनारे बसे मकान ताश के पत्तों की तरह गंगा में समा जाते हैं। पहले भी 15 से 20 पक्के मकान कटाव के कारण गंगा में बह चुके हैं, जिससे कई परिवार बेघर हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि वे पसीने की कमाई से घर बनाते हैं, लेकिन बाढ़ हर साल उनके सपनों को बहा ले जाती है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे कटावरोधी कार्य में भारी अनियमितता है। जेसीबी से घाट की ही मिट्टी काटकर गंगा किनारे लगाई जा रही है, जिससे उन्हें आशंका है कि बाढ़ में पहले से भी ज्यादा कटाव हो सकता है। विभाग द्वारा काम बहुत धीमी गति से किया जा रहा है; अभी तक 10 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हुआ है। जिस तरह से काम चल रहा है, बाढ़ आने तक इसे पूरा कर पाना असंभव है। यह लापरवाही हर साल नदी कटाव की समस्या को और गंभीर कर देती है।
घटिया सामग्री और अधिकारियों की लापरवाही
कटाव रोकने के लिए गंगा में जो जियो बैग डाले जा रहे हैं, वे भी काफी घटिया गुणवत्ता के दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी के ऊपर जियो बैग डालने से कटाव नहीं रुकेगा, बल्कि इन्हें पानी के अंदर डालना चाहिए ताकि वे प्रभावी हों। उन्होंने पहले भी इस मामले पर आंदोलन किया है, लेकिन कोई प्रभाव नहीं पड़ा। स्थानीय सांसद और विधायक आते हैं, आश्वासन देकर चले जाते हैं, लेकिन हर साल कटाव जारी रहता है और लोगों को अपनी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
फरका पंचायत के ग्रामीण सरकार और प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द कटावरोधी कार्य में सुधार किया जाए और गुणवत्तापूर्ण काम सुनिश्चित किया जाए, ताकि आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। इस बाढ़ कटाव से निपटने के लिए ठोस और ईमानदारी भरा काम आवश्यक है। यदि समय रहते इस नदी कटाव पर ध्यान नहीं दिया गया, तो मानसून में भयंकर तबाही मच सकती है।
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