
भागलपुर न्यूज़.
सिल्क सिटी की हवा ही नहीं, अब पानी भी सेहत के लिए खतरनाक हो गया है. शहर के कई इलाकों में नलों से ऐसा पानी आ रहा है, जिसे पीना तो दूर, छूने से भी डर लगे. आखिर गंगा किनारे बसे इस शहर में पानी के लिए हाहाकार क्यों मचा है?
भागलपुर में एक बार फिर गंभीर जल संकट ने दस्तक दे दी है. शहर के कई मोहल्लों में वाटर वर्क्स से सप्लाई किया जाने वाला पानी इतना दूषित और बदबूदार है कि लोग उसे इस्तेमाल करने से कतरा रहे हैं. स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि लोगों को पीने के पानी के लिए या तो अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है या फिर दूर लगे चापाकलों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. इस समस्या ने शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि दूषित पानी कई गंभीर बीमारियों को न्योता दे सकता है.
खासकर मुंदीचक और आदमपुर जैसे इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. यहाँ के निवासियों की शिकायत है कि नलों से आने वाला पानी पूरी तरह से इस्तेमाल के लायक नहीं है. यह संकट सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है, लेकिन इसका समाधान दूर-दूर तक नज़र नहीं आ रहा है.
नलों से बह रहा बदबूदार और रंगीन पानी
शहर के अलग-अलग हिस्सों में पानी की गुणवत्ता में भारी गिरावट देखी गई है. लोगों के अनुसार, पानी का रंग और गंध दोनों ही चिंताजनक हैं. शिकायतों के मुताबिक:
- मुंदीचक: इस इलाके में नलों से आने वाला पानी हरा और बेहद बदबूदार है. लोगों का कहना है कि पानी से इतनी तेज दुर्गंध आती है कि उसे किसी भी काम में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
- आदमपुर: वहीं, आदमपुर क्षेत्र में लोगों के घरों में लाल और मटमैला पानी सप्लाई हो रहा है. यह पानी देखने में ही इतना गंदा है कि कोई भी इसे पीने का जोखिम नहीं उठाना चाहता.
इन इलाकों के निवासी पीने के पानी के लिए पूरी तरह से बाजार से खरीदे गए पानी पर निर्भर हो गए हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.
गंगा का जलस्तर घटने से बढ़ी मुसीबत
इस पूरे जल संकट की जड़ में गंगा नदी का घटता जलस्तर है. जानकारी के अनुसार, गंगा नदी का पानी काफी दूर चला गया है, जिससे वाटर वर्क्स के इंटेक वेल तक नदी का साफ पानी नहीं पहुँच पा रहा है. जलस्तर घटने के कारण नदी में शहर के नालों से गिरने वाले गंदे पानी का घनत्व बढ़ गया है.
जब वाटर वर्क्स पानी खींचता है, तो नदी के साफ पानी के बजाय गाद और नाले का प्रदूषित पानी अधिक मात्रा में आ जाता है. यही वजह है कि फिल्ट्रेशन के बाद भी पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो पा रहा है और घरों तक दूषित पानी पहुँच रहा है. जब तक गंगा का जलस्तर नहीं बढ़ता, तब तक इस समस्या से निजात मिलना मुश्किल लग रहा है.




