spot_img

खरमास 2026: जानिए क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य इस खरमास में?

spot_img
- Advertisement -

Kharmas: सनातन धर्म में खरमास को एक विशेष कालखंड माना गया है, जब समस्त शुभ और मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। यह अवधि सूर्य के राशि परिवर्तन से जुड़ी है और इसका ज्योतिषीय एवं आध्यात्मिक महत्व गहरा है।

- Advertisement -

खरमास 2026: जानिए क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य इस खरमास में?

साल 2026 में 15 मार्च से खरमास की शुरुआत हो रही है, जो कि अगले एक महीने तक जारी रहेगा। इस पूरे माह में किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों जैसे विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, उपनयन संस्कार आदि पर रोक लग जाती है। ज्योतिष शास्त्र में खरमास की अवधि को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस दौरान सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ‘मलमास’ या ‘खरमास’ कहा जाता है। आइए, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस विशेष लेख में हम जानेंगे कि आखिर क्यों इस अवधि को इतना अशुभ माना जाता है और ‘खरमास’ नाम के पीछे क्या पौराणिक रहस्य छिपा है।

- Advertisement -

खरमास क्या है और क्यों है यह खरमास अशुभ?

ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस कालखंड को खरमास कहा जाता है। सूर्य का इन राशियों में प्रवेश करने पर उनकी ऊर्जा कुछ कम हो जाती है, जिससे शुभ कार्यों के लिए आवश्यक बल प्राप्त नहीं हो पाता। यही कारण है कि इस दौरान किए गए शुभ कार्यों में सफलता की गारंटी नहीं मानी जाती और उनमें विघ्न आने की आशंका बनी रहती है। यह एक ऐसा समय है जब प्रकृति भी एक प्रकार के संक्रमण काल से गुजरती है, जिसका प्रभाव मानवीय गतिविधियों पर भी पड़ता है।

- Advertisement -

खरमास की पौराणिक कथा: सूर्य देव और गधों का रहस्य

खरमास के पीछे एक अत्यंत रोचक पौराणिक कथा है, जो इसके नाम और महत्व को स्पष्ट करती है। प्राचीन काल में भगवान सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड का निरंतर भ्रमण करते थे। यह उनके लिए अत्यंत आवश्यक था ताकि पूरे विश्व में प्रकाश और ऊर्जा का संचार बना रहे। एक बार सूर्य देव के घोड़े लगातार दौड़ते-दौड़ते थक गए और उन्हें प्यास भी लगने लगी। उनकी यह दशा देखकर सूर्य देव का हृदय द्रवित हो उठा।

सूर्य देव ने घोड़ों को एक जलाशय के पास आराम करने के लिए छोड़ दिया, ताकि वे पानी पीकर अपनी थकान मिटा सकें। लेकिन समस्या यह थी कि यदि घोड़े रुक जाते, तो ब्रह्मांड का चक्र भी रुक जाता, जिससे हाहाकार मच जाता। इस विकट परिस्थिति में, सूर्य देव ने जलाशय के निकट दो गधों (जिन्हें ‘खर’ कहा जाता है) को देखा। उन्होंने तुरंत उन गधों को अपने रथ से जोड़ा और अपनी यात्रा जारी रखी।

गधे घोड़ों जितने तीव्र गति से नहीं चल सकते थे, इसलिए सूर्य देव का रथ मंद गति से आगे बढ़ा। जैसे-तैसे सूर्य देव ने इस माह का चक्र पूरा किया। ज्योतिष में ‘खर’ शब्द का अर्थ गधा होता है, और चूंकि इस माह में सूर्य देव का रथ गधों द्वारा खींचा गया, इसलिए इस अवधि को ‘खरमास’ कहा जाने लगा। इस दौरान सूर्य की गति धीमी हो जाती है और उनकी ऊर्जा भी क्षीण मानी जाती है, जिससे शुभ कार्य करना वर्जित होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

खरमास में क्या करें और क्या न करें?

खरमास की अवधि में कुछ कार्यों को विशेष रूप से वर्जित किया गया है, जबकि कुछ आध्यात्मिक कार्यों को करने से विशेष लाभ मिलता है।

**क्या न करें:**
* विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यापार का शुभारंभ, मुंडन, उपनयन संस्कार जैसे सभी मांगलिक कार्य वर्जित हैं।
* नया घर खरीदना या बेचना भी इस अवधि में शुभ नहीं माना जाता।
* किसी भी प्रकार के बड़े निवेश या महत्वपूर्ण अनुष्ठान से बचना चाहिए।

**क्या करें:**
* इस अवधि में भगवान सूर्य देव की उपासना करना अत्यंत फलदायी होता है। नित्य सूर्य को अर्घ्य दें।
* भगवान विष्णु की पूजा, विशेष रूप से सत्यनारायण कथा का पाठ, लाभकारी माना जाता है।
* दान-पुण्य और तीर्थ यात्राएं करना शुभ होता है।
* गंगा स्नान और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
* साधना, मंत्र जाप और आध्यात्मिक अध्ययन के लिए यह समय उत्तम है।

इस प्रकार, खरमास का महीना आत्म-चिंतन, ईश्वर भक्ति और पुण्य कर्मों के लिए समर्पित होता है। यह अवधि हमें भौतिकवादी गतिविधियों से हटकर आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होने का अवसर प्रदान करती है।

धर्म, व्रत और त्योहारों की संपूर्ण जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

खरमास का समय हमें प्रकृति के नियमों और खगोलीय घटनाओं के प्रति सम्मान सिखाता है। यह मात्र अशुभ काल नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और परमात्मा से जुड़ने का एक स्वर्णिम अवसर है। इस दौरान धैर्य रखें, ईश्वर का स्मरण करें और शुभ ऊर्जाओं का संचय करें ताकि खरमास समाप्त होते ही आप नए उत्साह और सकारात्मकता के साथ अपने कार्यों को आगे बढ़ा सकें।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

Rashifal 16 June: 16 जून राशिफल: त्रिपुष्कर योग में इन राशियों की होगी चांदी, धन-धान्य से भर जाएगी झोली! जानिए

Rashifal 16 June: आज 16 जून को त्रिपुष्कर योग के साथ चंद्रमा और सूर्य मिथुन राशि में रहेंगे। इस शुभ संयोग से कई राशियों को जबरदस्त धन लाभ और करियर में तरक्की के मौके मिलेंगे, जानRashifal,16June,TripushkarYog

Bihar Development: सोन नदी पर बिहार को मिला दो-तिहाई हिस्सा,CM Samrat Chaudhary का बड़ा ऐलान, बैराज निर्माण, जल बंटवारे, सिंचाई विस्तार, बाढ़ नियंत्रण और...

Bihar Development: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भोजपुर में 31 करोड़ के एक्वा पार्क का शिलान्यास किया। उन्होंने सोन नदी के जल बंटवारे पर बिहार-झारखंड के बीच सहमति और मनेर बBiharDevelopment,AquaPark,SonRiver

Bhagalpur News: भागलपुर में मंत्रियों नीतीश मिश्रा और इंजीनियर शैलेंद्र का एक्शन: 3 घंटे चली बैठक में विकास कार्यों को मिला नया आयाम

Bhagalpur News: भागलपुर में नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा और पथ निर्माण मंत्री शैलेंद्र ने विकास योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को समय पर काम पूरा करने केBhagalpurNews,NitishMishra,BiharDevelopment

Bhagalpur Land Dispute: भागलपुर में जमीन को लेकर खूनी झड़प! 8 लोग जख्मी, 4 की हालत गंभीर

Bhagalpur Land Dispute: भागलपुर जिले के भीमकित्ता गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों में खूनी संघर्ष हो गया, जिसमें आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। चार घायलों को जेएलएनएमसीएच रेफर क#BhagalpurViolence,#LandDisputeBihar,#BhimkittaNews