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मार्च, 23, 2026
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कहलगांव में Bhagat Singh को किया याद, जानिए क्यों आज भी प्रासंगिक हैं शहीद-ए-आजम के विचार

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Bhagat Singh: जब क्रांति की चिंगारी शोलों में बदलती है, तो इतिहास के पन्नों पर अमर शहीदों का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो जाता है। कहलगांव में भी कुछ ऐसा ही नजारा दिखा जब उनके शहादत दिवस पर ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे गूंज उठे।

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कहलगांव में Bhagat Singh को किया याद, जानिए क्यों आज भी प्रासंगिक हैं शहीद-ए-आजम के विचार

भाकपा माले ने शहीद-ए-आजम, सुखदेव और राजगुरु का शहादत दिवस बड़े सम्मान के साथ मनाया। यह कार्यक्रम कहलगांव प्रखण्ड के बिरबन्ना पंचायत स्थित दयालपुर गांव में आयोजित किया गया, जिसका नेतृत्व प्रखण्ड सचिव रणधीर यादव ने किया। इस दौरान, पार्टी के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने शहीदों के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनकी याद में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।

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क्यों जरूरी है Bhagat Singh के सपनों का भारत?

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए रणधीर यादव ने कहा कि आज उन महान क्रांतिकारियों की शहादत को 95 साल पूरे हो गए हैं, जिन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संपूर्ण आजादी के संघर्ष को एक नई आग दी थी। उन्होंने कहा कि भले ही रावी नदी में तब से बहुत पानी बह चुका है और लाहौर अब पाकिस्तान का हिस्सा है, लेकिन दोनों देशों में शहीद-ए-आजम का संदेश आज और भी महत्वपूर्ण हो गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। वर्तमान हालात में ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘साम्राज्यवाद का नाश हो’ जैसे नारे पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक लगते हैं। उन्होंने कहा कि शहीद-ए-आजम अपने समय के अग्रणी क्रांतिकारी थे, जिन्होंने मात्र बारह साल की उम्र में जलियांवाला बाग का बर्बर नरसंहार देखा था।

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यह भी पढ़ें:  Bhagat Singh को भागलपुर ने किया नमन, शहादत पर लिया गया उनके सपनों का भारत बनाने का संकल्प

रणधीर यादव ने ऐतिहासिक ‘पगड़ी संभाल जट्टा’ किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह उस आंदोलन ने अंग्रेज शासकों को तीन किसान विरोधी कानूनों को रद्द करने पर मजबूर किया था, ठीक उसी तरह हाल के कॉरपोरेट परस्त कृषि कानूनों को भी सरकार को वापस लेना पड़ा। यह हमारे महान स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के विचारों की जीत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शहीदों की देशभक्ति केवल भारत को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराने तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि वे भारत में समाजवाद की स्थापना चाहते थे, ताकि करोड़ों मेहनतकश भारतीय वास्तव में सत्ता सम्पन्न और आजाद बनें। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

शहीदों के रास्ते पर चलने का लिया संकल्प

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। इनमें मृत्युंजय कापरी, घनश्याम मंडल, बादल तांती, विनय यादव, और कपिलदेव मंडल प्रमुख थे। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि शहीदों का सपना एक ऐसे समाज का निर्माण करना था जो हर तरह के दमन, शोषण और गुलामी से मुक्त हो। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रूसी क्रांति से प्रेरणा लेकर हमारे क्रांतिकारियों ने जो रास्ता दिखाया था, वह आज भी हमारा मार्गदर्शन करता है। कार्यक्रम में रॉकी यादव, विश्वनाथ केशरी, मुकेश सिंह, अजय सिंह, मनोज मंडल, और सुजीत कुमार समेत दर्जनों लोग उपस्थित रहे और उन्होंने शहीदों के दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।

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