
Labor Code Protest: देश में मजदूरों के अधिकार दांव पर हैं। एक अप्रैल से लागू होने जा रहे नए लेबर कोड कानून मजदूरों के लिए गुलामी का नया दस्तावेज बताए जा रहे हैं, जिनके खिलाफ आक्रोश पूरे देश में सुलग उठा है। भागलपुर सहित पूरे देश में मजदूर संगठन इन कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं और इसके लिए 1 अप्रैल को ‘काला दिवस’ मनाने का आह्वान किया गया है।
नए लेबर कोड कानूनों को लागू किए जाने के खिलाफ एक अप्रैल 2026 को आहूत देशव्यापी ‘काला दिवस’ को लेकर शनिवार को स्थानीय कचहरी परिसर में मजदूर संगठनों की एक संयुक्त बैठक हुई। इस बैठक में एक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त, एटक के जिला महासचिव डॉ. सुधीर शर्मा, सीटू के जिला सचिव दशरथ प्रसाद, सेवा की मौसम देवी और पूनम केशरी के साथ इंटक के जिला अध्यक्ष ई. रवि कुमार जैसे प्रमुख मजदूर नेता शामिल हुए। इस दौरान एकजुट होकर निर्णय लिया गया कि एक अप्रैल को ‘काला दिवस’ के अवसर पर संगठित व असंगठित दोनों क्षेत्रों के मजदूर अपने-अपने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर लेबर कोड कानून लागू किए जाने का पुरजोर विरोध करेंगे। इसके अतिरिक्त, संध्या के समय स्थानीय स्टेशन चौक पर सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियन एक साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
लेबर कोड प्रोटेस्ट: क्यों हो रहा है मजदूरों का आक्रोश?
मजदूर संगठनों के नेतृत्वकारियों ने लेबर कोड कानून का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि 12 फरवरी 2026 को की गई आम हड़ताल के माध्यम से देश के मजदूरों ने इन ‘गुलामी वाले’ चार लेबर कोडों को पहले ही खारिज कर दिया है। बावजूद इसके, केंद्र की विनाशकारी मोदी सरकार इन कोडों को मजदूरों के लिए फायदेमंद बताने के लिए लगातार झूठा प्रचार कर रही है और इसे एक अप्रैल से लागू करने पर उतारू है। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने इसे लागू नहीं होने देने और मजदूरों के अधिकारों पर हो रहे तीखे हमलों को रोकने के लिए 1 अप्रैल 2026 को देशव्यापी ‘काला दिवस’ का आह्वान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने भी इस ‘काला दिवस’ का समर्थन किया है।
नेतृत्वकारियों ने आगे कहा कि मौजूदा लेबर कानून, जो मजदूरों को कुछ कानूनी सुरक्षा और अधिकार देते थे, उन्हें खत्म करके बनाए गए चार लेबर कोड मजदूरों को गुलाम बना देंगे और मालिकों की तानाशाही स्थापित करेंगे। इसके जरिए मजदूरों को लगभग डेढ़ सौ साल पीछे के ‘अंधेरे युग’ में धकेल दिया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ये कोड अधिकांश मजदूरों को ‘मजदूर’ के दर्जे और दायरे से ही बाहर कर देंगे, जिससे उनका अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
क्या हैं नए लेबर कोड और उनका इतिहास?
मौजूदा लेबर कानून, जो मजदूरों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं, ब्रिटिश औपनिवेशिक राज के खिलाफ भारतीय नागरिकों के संघर्षों और कुर्बानियों से हासिल हुए थे। इसलिए, इन लेबर कानूनों को खत्म करके बनाए गए ये नए कोड देश के संविधान पर एक बड़ा हमला है, जो संविधान को खत्म करने की मोदी सरकार की साजिश का ही एक हिस्सा है। इन कोडों को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाया गया था, ताकि मजदूरों का शोषण करके कॉर्पोरेट मालिकों के लिए अकूत मुनाफा सुनिश्चित किया जा सके। मजदूरों के अधिकारों का हनन किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
मजदूर संगठनों ने संकल्प लिया है कि वे इन मजदूर विरोधी कानूनों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और सरकार को इन्हें वापस लेने के लिए मजबूर करेंगे। यह लड़ाई केवल मजदूरों के लिए नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के मूल्यों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की रक्षा के लिए भी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
आगे की रणनीति और देशव्यापी समर्थन
बैठक में आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया, जिसमें भविष्य के आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई। विभिन्न मजदूर संगठनों के नेताओं ने एक स्वर में कहा कि वे मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन मिलने से इस आंदोलन को और मजबूती मिली है, जो दर्शाता है कि देश के किसान और मजदूर एकजुट होकर सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का लक्ष्य सरकार पर दबाव बनाना है ताकि वह इन विवादास्पद लेबर कोडों को रद्द करे और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करे।




