Arrah News: आरा में भरत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस घटना पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिससे सूबे की सियासत गरमा गई है। इस मामले में पहले ही चार पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं और आगे की जांच जारी है।
शिक्षा मंत्री के बयान से गरमाई सियासत
”यदि एनकाउंटर ही करना था तो हाफ एनकाउंटर करते। पुलिस को एनकाउंटर से पहले बहुत कुछ करना चाहिए था।”
🔥 आज की बड़ी खबर, आपने पढ़ा क्या?‘कुबूल है’ बुलवाया, ब्लैकमेल किया…नशीला जूस पिलाकर बनाया VIDEO, IAF अधिकारी की पत्नी से रेप मामले में, मौलवी के सरेंडर से खुली खौफनाक साजिश की परतें!शहीद शुभम कुमार के पिता को कथित पत्नी का चौंकाने वाला फोन, मुआवजे पर बढ़ा विवाद!बिहार के शहीद बेटे फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की सम्मान राशि पर विवाद, ‘कथित पत्नी’ को मिले 21 लाख, पिता का छलका दर्द – जानिए क्यों भड़का परिवार!सरकारी नौकरी का रास्ता खुला, जमीन खरीदने में अब नहीं होगी दिक्कत: बिहार कैबिनेट के 29 बड़े फैसले
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उस युवक का व्यवहार भले ही ठीक नहीं था, लेकिन पुलिस को उसके आपराधिक इतिहास की पूरी जांच करनी चाहिए थी। मिथिलेश तिवारी ने जोर देकर कहा कि अगर एनकाउंटर इतना ही जरूरी था, तो पुलिस को ‘हाफ एनकाउंटर’ का विकल्प चुनना चाहिए था। उन्होंने यह भी बताया कि बिहार सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। परिजनों का आरोप है कि उसे पांच से ज्यादा गोलियां मारी गईं। स्थानीय लोगों ने तिवारी को समाजसेवी बताते हुए पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया है। इस घटनाक्रम ने भरत भूषण तिवारी की मानसिक स्थिति पर भी सवाल खड़े किए। मंगलवार रात भोजपुर पुलिस ने एक प्रेस विज्ञप्ति में तिवारी को मानसिक रूप से बीमार बताया था, हालांकि बुधवार को जारी विज्ञप्ति में पुलिस ने उनके खतरनाक कृत्यों पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे जनता और पुलिस दोनों के लिए खतरा पैदा हुआ था।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस घटना का जिक्र किया था। उन्होंने एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए कहा था कि बिहार पुलिसकर्मियों को खुलेआम धमकी देते एक व्यक्ति को देखकर वे व्याकुल हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री के इस बयान के तुरंत बाद ही भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर की खबर सामने आ गई थी। बीजेपी के शाहपुर विधायक राकेश ओझा ने भी परिवार का समर्थन करते हुए कहा कि वे एनकाउंटर की जांच करवाएंगे और परिवार की अन्य मांगों को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 17 जून, 2026 की सुबह लगभग 9 बजे का है, जब भोजपुर पुलिस को भरत भूषण तिवारी नामक एक व्यक्ति के बारे में सूचना मिली। आरोप था कि वह पिस्तौल लहरा रहा था और हवा में गोलियां चला रहा था। पुलिस की एक टीम, जिसमें भोजपुर एसटीएफ भी शामिल थी, बिलौटी गांव पहुंची और तिवारी से आत्मसमर्पण करने को कहा। पुलिस के अनुसार, तिवारी ने पिस्तौल लिए पुलिस पर रुक-रुक कर गोलियां चलाना जारी रखा, जिससे जनता और पुलिस दोनों के जीवन को गंभीर खतरा पैदा हो गया। पुलिस ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि बुलेटप्रूफ जैकेट पहने एसटीएफ कर्मियों ने आरोपी को घेरने की कोशिश की, जिसके बाद तिवारी ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी।
इस घटना के बाद से पुलिस की कार्रवाई पर लगातार सवाल उठ रहे हैं और प्रशासन पर निष्पक्ष जांच का दबाव बढ़ता जा रहा है। मामले की पूरी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।










