
Darbhanga News: आसमान से बरसी आफत ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बेनीपुर में आंधी-तूफान ने लहलहाती रबी की फसल को तहस-नहस कर दिया है, और अब अन्नदाता सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठा है। पहले बाढ़ और सुखाड़ की मार झेल रहे बेनीपुर अनुमंडल के किसानों के लिए अब तूफान से बर्बाद हुई रबी फसल का मुआवजा ही एकमात्र सहारा है।
Darbhanga News: कृषि विभाग ने सरकार को भेजी क्षति की रिपोर्ट
सरकार के दिशा-निर्देशों के बाद प्रखंड कृषि विभाग ने फसल क्षति का आकलन पूरा कर अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, बेनीपुर प्रखंड में कुल 8465 हेक्टेयर भूमि पर रबी की फसल लगाई गई थी। इसमें से 3789 हेक्टेयर में लगी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। अब इसी आकलन के आधार पर सरकार से किसानों के लिए अनुदान की मांग की जाएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रिपोर्ट के मुताबिक, नुकसान का सबसे ज्यादा असर प्रखंड के दक्षिणी हिस्से की पंचायतों में देखने को मिला है, जबकि अन्य पंचायतों में आंशिक क्षति दर्ज की गई है।
प्रत्येक पंचायत के किसान सलाहकारों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, महिनाम पंचायत में 390 हेक्टेयर, सज्जनपुरा में 245, पोहद्दी पश्चिमी में 255, जरिसो में 240, तरौनी में 249, नवादा में 140, धेरुख में 146, हावीभौआर में 150 और सझुआर में 145 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा है। इसी तरह माधोपुर में 135, शिवराम में 126, बसुहाम में 170, डखराम में 130, बाथो रढियाम में 135, देवराम अमेठी में 140, गणेश बनौल बलनी में 133, रमौली में 130, हरिपुर में 160, मकरमपुर में 125, बेनीपुर में 150 और मझौरा में 135 हेक्टेयर फसल क्षति का आकलन किया गया है, जिसके आधार पर फसल क्षति मुआवजा की मांग की जाएगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। अब यह पूरी तरह सरकार पर निर्भर करता है कि किसानों को यह राहत राशि कब तक मिल पाती है।
अभी और बढ़ सकता है तबाही का आंकड़ा
इस मामले पर जानकारी देते हुए प्रखंड कृषि पदाधिकारी सूरज राम ने बताया कि यह सर्वे 20 मार्च को आए आंधी-तूफान से हुई बर्बादी के आधार पर तैयार किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसके बाद भी कई बार तेज आंधी और बारिश हुई है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जिससे फसलों को और भी नुकसान हुआ है। उस नुकसान का आकलन किया जाना अभी बाकी है। ऐसे में यह तय है कि बर्बादी का अंतिम आंकड़ा मौजूदा 3789 हेक्टेयर से कहीं ज्यादा होगा। किसानों की निगाहें अब पूरी तरह से सरकारी मदद पर टिकी हुई हैं।





