Benipur Jurisdiction: क्या एक वीरान पड़ा न्यायालय भवन जल्द ही गुलजार हो सकेगा? क्या एक अनुमंडल जो अपनी आखिरी सांसें गिन रहा है, उसे नई जान मिलेगी? यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि बेनीपुर के एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने मुख्यमंत्री से बड़ी मांग की है, जिससे बेनीपुर अनुमंडल का दायरा बढ़ेगा और लाखों लोगों को राहत मिलेगी। यह मांग उस वक्त की गई है जब मुख्यमंत्री ने बेनीपुर में विशेष एक्साइज न्यायालय की स्थापना का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिसके लिए अधिवक्ता चौधरी ने समस्त बेनीपुर वासियों की ओर से आभार व्यक्त किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
बेनीपुर ज्यूरिसडिक्शन का विस्तार: क्यों है जरूरी?
बेनीपुर बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव और अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति (युवा प्रकोष्ठ) के राष्ट्रीय महामंत्री अधिवक्ता सुशील कुमार चौधरी ने मुख्यमंत्री को ईमेल और रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से कई समस्याओं से अवगत कराया है। भेजे गए आवेदन में उन्होंने मनीगाछी, सकतपुर, बहेड़ी और घनश्यामपुर प्रखंडों को बेनीपुर अनुमंडल के प्रशासनिक और न्यायिक क्षेत्राधिकार में शामिल करने की मांग की है। श्री चौधरी का मानना है कि इस विस्तार से बेनीपुर ज्यूरिसडिक्शन का क्षेत्र बढ़ेगा, मुकदमों की संख्या में इजाफा होगा और ₹15 करोड़ की लागत से बना आलीशान न्यायालय भवन अपनी सार्थकता साबित कर पाएगा। यह भवन फिलहाल मुकदमों के अभाव में वीरान पड़ा है, जो सार्वजनिक धन का अपव्यय है।
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अनुमंडल की दयनीय स्थिति और जनता की परेशानी
अधिवक्ता चौधरी ने मुख्यमंत्री का ध्यान बेनीपुर अनुमंडल की वर्तमान स्थिति की ओर भी दिलाया। उन्होंने बताया कि यह अनुमंडल मात्र दो प्रखंडों – बेनीपुर और अलीनगर – पर चल रहा है और अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। उन्होंने विस्तार से बताया कि मनीगाछी, सकतपुर और बहेड़ी की आम जनता को पुलिस संबंधी कार्यों के लिए तो बेनीपुर आना पड़ता है, लेकिन राजस्व और न्यायिक कार्यों के लिए उन्हें 40 किलोमीटर दूर दरभंगा सदर जाना पड़ता है। इस यात्रा में गरीब जनता के कम से कम 500 रुपये सिर्फ किराए में बर्बाद हो जाते हैं। इसी तरह, घनश्यामपुर के निवासियों को भी बेनीपुर होते हुए बिरौल जाने को मजबूर होना पड़ता है। इन प्रखंडों को बेनीपुर व्यवहार न्यायालय और अनुमंडल के न्यायिक क्षेत्राधिकार में फिर से शामिल करने से लोगों को समय और पैसे दोनों की बचत होगी, साथ ही उन्हें अनावश्यक भागदौड़ से भी मुक्ति मिलेगी। इस मांग को स्थानीय विधायक प्रोफेसर विनय कुमार चौधरी ने भी पिछले विधानसभा सत्र के दौरान पुरजोर तरीके से उठाया था, जिस पर सरकार की ओर से सकारात्मक जवाब भी मिला था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।







