
Ram Katha: बेनीपुर के सझुआर गांव की धरती पर मानो भक्ति का अमृत बरस रहा हो, जहां श्री राम कथा के पांचवें दिन अलौकिक आनंद की गंगा बह निकली। प्रखंड क्षेत्र के महावीर जी मंदिर परिसर में आयोजित इस भव्य कथा के पांचवें दिवस पर पूरा वातावरण राममय हो गया।
Ram Katha: बेनीपुर। प्रखंड क्षेत्र के सझुआर गांव स्थित महावीर जी मंदिर परिसर में आयोजित श्री राम कथा के पांचवें दिवस पर वातावरण भक्ति के रंग में डूब गया। कथावाचक नंद जी महाराज ने जब भगवान राम की बाल क्रीड़ाओं का मनमोहक वर्णन शुरू किया, तो श्रोता भाव-विभोर हो गए। उन्होंने बताया कि कैसे बालक राम अपने भाइयों के संग वन-विहार करते हुए चमत्कार दिखाते थे, वृक्षों को झुका देते थे और प्राकृतिक शक्तियों पर विजय प्राप्त करते थे। यह सुनकर उपस्थित ग्रामीणों के चेहरे पर आनंद की लहर दौड़ गई।
Ram Katha में गूंजी भगवान राम की बाल लीलाएं
नंद जी महाराज ने कथा को आगे बढ़ाते हुए काक भूसुंडी के रोचक प्रसंग पर प्रकाश डाला। उन्होंने भावपूर्ण स्वर में कहा, “काक भूसुंडी अपने पूर्व जन्म में एक ब्राह्मण थे, लेकिन गुरु की आज्ञा का उल्लंघन करने पर उन्हें श्राप मिला और कौवे का शरीर धारण करना पड़ा।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने समझाया कि उसी कौवे के शरीर में उन्हें भगवान राम की अनन्य भक्ति का अनुभव हुआ, जो यह दर्शाता है कि भक्ति के लिए कोई भी शरीर बाधा नहीं बन सकता।
महाराज जी ने एक गहरा संदेश देते हुए कहा, “भक्ति में शरीर की कोई बाधा नहीं होती, केवल सच्चा भाव ही प्रबल होता है। इसलिए, आप जिस भी देश में रहें, जिस भी वेश में हों, या जिस भी परिवेश में हों—राधा रमण, राधा रमण का जाप करते रहें।” उन्होंने कहा कि जब कौवे के रूप में भी भगवान ने भक्ति प्रदान की, तो हमारा यह मानव जन्म व्यर्थ कैसे जा सकता है? देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
भक्ति में शरीर नहीं, भाव प्रबल है: नंद जी महाराज का संदेश
इस विशेष अवसर पर वृंदावन से पधारे संत श्री राम कुमार दास जी की उपस्थिति ने कथा को और भी समृद्ध बना दिया। उन्होंने अपनी अमृत वाणी से भक्ति मार्ग पर चल रहे लोगों का मार्गदर्शन किया। इस धार्मिक उत्सव ने सामुदायिक एकता को और भी मजबूत किया है, जहां गांव के सभी ग्रामीण, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग—सभी ने इस प्रतिष्ठित कथा का खूब रसपान किया। कथा के बीच में संगीतमय प्रस्तुतियों का दौर भी चला।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मंच पर फूलों की मालाओं से अद्भुत सजावट की गई थी और दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का संचालन हो रहा था। कथा के बाद भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।
संगीत और भक्ति का अद्भुत संगम
कथा के दौरान संगीतमय प्रस्तुति ने समां बांध दिया। गायक अजीत पाठक ने जब तबले की थाप पर ‘बम बम झा ने’ भजन गाया, तो उनका सुरम्य स्वर सुनकर श्रोता झूमने पर मजबूर हो गए। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं भगवान राम की उपस्थिति में सब नृत्य कर रहे हों। कथा आयोजक समिति ने जानकारी दी कि कथा के शेष दिनों में और भी गहन प्रसंग सुनाए जाएंगे। यह कथा न केवल आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान कर रही है, बल्कि स्थानीय लोक संस्कृति को भी जीवंत बना रही है, और आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


