
Crop Damage: किसानों के लिए आसमान से पानी नहीं, आफत बरस रही है। मौसम की बेरुखी ने एक बार फिर अन्नदाताओं को दोहरी आर्थिक मार झेलने पर मजबूर कर दिया है, जिससे उनकी उम्मीदें भी खेतों में डूबती नजर आ रही हैं। पिछले साल खरीफ फसल के नुकसान को किसान अभी भुला भी नहीं पाए थे कि इस बार रबी फसल की बर्बादी ने उनकी कमर तोड़ कर रख दी है।
कमतौल क्षेत्र के किसान कपिलदेव राय, सकलदेव राय और इंद्रदेव राय ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि खरीफ फसल में हुए नुकसान की भरपाई की उम्मीद से उन्होंने चार एकड़ में मक्के की खेती की थी। लेकिन दो दिनों की मूसलाधार बारिश ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। खेतों में पानी भर जाने और नमी के कारण फसलें गिरकर सड़ने लगी हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। स्थिति यह है कि किसान अब अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत को बर्बाद होते देख रहे हैं।
Crop Damage से मक्का किसान बेहाल
अहियारी दक्षिणी पंचायत के कई किसानों ने बताया कि लगभग दो दशक पहले जंगली जानवरों के आतंक के कारण उन्होंने मक्के की खेती करना छोड़ दिया था। इस साल बेहतर आमदनी की उम्मीद में उन्होंने फिर से बड़े उत्साह के साथ मक्के की खेती शुरू की, लेकिन उन्हें क्या पता था कि इस बार आसमानी आफत उनकी मेहनत पर कहर बनकर टूटेगी। शुक्रवार और शनिवार को हुई बेमौसम बारिश और आंधी ने लगभग पांच से दस एकड़ में लगी मक्के की फसल को पूरी तरह डुबो दिया है।
रविवार को मौसम थोड़ा साफ हुआ तो किसान पम्पिंग सेट लगाकर खेतों से पानी निकालने की जद्दोजहद में जुट गए। कई किसान पानी में तैरकर किसी तरह फसल को बचाने की आखिरी कोशिश करते नजर आए। चंद्रजीत राय नामक एक अन्य किसान ने बताया कि बारिश और आंधी के कारण मक्के के पौधे पानी में पूरी तरह डूब गए हैं, जिससे किसानों को अब दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
कर्ज में डूबे किसान, प्रशासन से मदद की गुहार
किसानों का कहना है कि वे पिछले साल से लगातार प्रकृति की मार झेल रहे हैं। पिछले वर्ष भारी बारिश ने धान की फसल बर्बाद कर दी थी और इस बार मक्के की फसल पर आफत आ पड़ी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। एक के बाद एक फसल बर्बाद होने से किसान कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
किसानों ने भारी निराशा जताते हुए कहा कि उनकी पूरी जमा-पूंजी और मेहनत बर्बाद हो गई है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से नुकसान का जायजा लेने या किसी भी तरह की मदद के लिए कोई पहल नहीं की गई है। किसानों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजे की मांग की है, ताकि उन्हें कुछ राहत मिल सके। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अन्नदाताओं को अब सरकारी मदद का ही एकमात्र सहारा है।







