
Bihar Board Result: परीक्षा के नतीजे सिर्फ़ छात्रों का रिपोर्ट कार्ड नहीं होते, बल्कि उस पूरी शिक्षा व्यवस्था का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख देते हैं, जिसकी बुनियाद पर भविष्य की इमारत खड़ी होती है। जाले में इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणाम घोषित होते ही कुछ ऐसा ही मिला-जुला माहौल देखने को मिला, जहां कुछ घरों में जश्न की शहनाइयां गूंज रही हैं, तो कई घरों में भविष्य की चिंता ने दस्तक दी है।
Bihar Board Result: कहीं खुशी तो कहीं गम, शिक्षक की कमी से डूबा छात्रों का भविष्य, भूगोल में सभी फेल!
Bihar Board Result में दिखा मिला-जुला असर
इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम सामने आते ही जाले क्षेत्र में सफल छात्र-छात्राओं के बीच जहां खुशी और जश्न का माहौल है, वहीं असफल परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों में गहरी मायूसी छाई हुई है। इस बीच, प्लस टू ठाकुर विंदेश्वर शर्मा उच्च माध्यमिक विद्यालय, ब्रह्मपुर पश्चिमी की छात्रा शिप्रा ने अपनी मेहनत का परचम लहराया है। शिप्रा ने 448 अंक प्राप्त कर न केवल विद्यालय में प्रथम स्थान हासिल किया, बल्कि अपने परिवार का नाम भी रोशन किया है। शिप्रा के पिता संजय कुमार मनमा मध्य विद्यालय में शिक्षक हैं, जबकि उनकी माता कविता कुमारी प्लस टू उच्च माध्यमिक विद्यालय, अहियारी गोट की प्रधानाध्यापिका हैं।
सफलता की इन कहानियों के बीच एक ऐसी तस्वीर भी है जो बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। प्लस टू उच्च माध्यमिक विद्यालय, रतनपुर का परिणाम बेहद निराशाजनक रहा, जिसकी वजह छात्रों की मेहनत में कमी नहीं, बल्कि विद्यालय में शिक्षकों का घोर अभाव है। यह teacher shortage की समस्या अब छात्रों के भविष्य पर भारी पड़ रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शिक्षकों की कमी बनी सबसे बड़ी बाधा
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका प्रियंका कुमारी ने बताया कि इस वर्ष कुल 32 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी थी, जिनमें 11 विज्ञान संकाय और 21 कला संकाय के थे। चिंता की बात यह है कि विज्ञान संकाय में केवल कम्प्यूटर और जीव-विज्ञान के ही शिक्षक पदस्थापित हैं। भौतिकी, रसायन शास्त्र और गणित जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए कोई शिक्षक ही नहीं है।
इससे भी बदतर स्थिति कला संकाय की है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यहां भूगोल शिक्षक के नहीं रहने का सीधा असर परीक्षा परिणाम पर पड़ा और इस विषय में शत-प्रतिशत छात्र-छात्राएं असफल हो गए। यह परिणाम बताता है कि बिना शिक्षक के छात्र कैसे परीक्षा पास कर सकते हैं? विद्यालय में विषयवार शिक्षकों की इस भारी कमी को लेकर अभिभावकों एवं विद्यार्थियों में गहरा रोष और चिंता व्याप्त है। उनका सवाल है कि जब शिक्षक ही नहीं होंगे तो उनके बच्चे कैसे पढ़ेंगे और कैसे अपना भविष्य संवारेंगे। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह स्थिति केवल एक स्कूल की नहीं, बल्कि बिहार के कई ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की सच्चाई बयां कर रही है।





