Bihar Maithili Language: बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है, जिससे छात्रों और मैथिली भाषा प्रेमियों में उत्साह का माहौल है। राज्य के नव स्थापित सरकारी डिग्री कॉलेजों में अब मैथिली भाषा को एक विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। इस फैसले को भाषाई शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को नए अवसर प्राप्त होंगे।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
नए सत्र से शुरू होगी मैथिली की पढ़ाई
जानकारी के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल (अवकाश प्राप्त) सय्यद अता हसनैन के निर्देश पर अगले शैक्षणिक सत्र से राज्य के सभी नए डिग्री कॉलेजों में मैथिली की पढ़ाई शुरू होगी। इस निर्णय का ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के विद्यापति पीठ और विश्वविद्यालय मैथिली विभाग ने गर्मजोशी से स्वागत किया है। विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में इस महत्वपूर्ण पहल के लिए राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और राज्यपाल-सह-कुलाधिपति के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
भाषा के विकास और रोजगार के नए अवसर
मैथिली विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अरुण कुमार कर्ण ने इस निर्णय पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि नए डिग्री कॉलेजों में मैथिली विषय के शामिल होने से विद्यार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि यह कदम शोध और रोजगार के नए अवसरों को सृजित करेगा, जो मैथिली भाषा के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दमन कुमार झा ने राज्यपाल-सह-कुलाधिपति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस निर्णय से विद्यार्थियों और शोधार्थियों में काफी खुशी और उत्साह का माहौल है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मातृभाषा के अध्ययन-अध्यापन को बढ़ावा मिलने से शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे और मैथिली विषय में अध्ययन कर रहे छात्रों के लिए भविष्य में रोजगार की असीम संभावनाएं पैदा होंगी।
मिथिलांचल में खुशी की लहर
इस अवसर पर शोधार्थियों और विभागीय कर्मचारियों ने भी इस निर्णय की सराहना की। प्रवीण कुमार, मिथिलेश कुमार चौधरी, राजनाथ पंडित, शिवम कुमार झा, प्रियंका कुमारी, मिथिलेश कुमार सहनी, मनोज कुमार पंडित, मनीष कुमार, शीला कुमारी, राजू कुमार शर्मा, अम्बालिका कुमारी और मनोज कुमार सहित नरेन्द्र कुमार और रामसेवक भारती ने राज्यपाल-सह-कुलाधिपति के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला लाखों विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है और इससे मैथिली भाषा के संरक्षण और संवर्धन को नई गति मिलेगी। भविष्य में भी मैथिली भाषा के विकास के लिए ऐसे सकारात्मक निर्णय लेने की उम्मीद जताई गई।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।यह निर्णय बिहार में भाषाई विविधता और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उम्मीद है कि यह पहल मैथिली भाषा को और अधिक लोकप्रिय बनाएगी और इसके अध्ययन को नए आयाम प्रदान करेगी, जिससे छात्रों के लिए उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा।






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