
Biodiversity Conservation: क्या आप जानते हैं कि आपके इर्द-गिर्द मौजूद पेड़-पौधे और जीव-जंतु ही आपके जीवन का आधार हैं? जरा सोचिए, अगर ये खत्म हो जाएं तो क्या होगा? इसी गंभीर विषय पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में एक अहम व्याख्यान आयोजित किया गया, जहां विशेषज्ञों ने जैव विविधता के महत्व पर प्रकाश डाला।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर वनस्पति विज्ञान विभाग में ‘अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस’ के विशेष अवसर पर एक आमंत्रित व्याख्यान का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी के सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो राजन कुमार गुप्ता मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित थे।

विभाग की अध्यक्ष डॉ सविता वर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, जबकि डॉ अंकित कुमार सिंह ने मुख्य वक्ता का परिचय देते हुए स्वागत भाषण दिया। उन्होंने प्रो. गुप्ता के अकादमिक और शोध कार्यों की सराहना करते हुए उपस्थित सभी शोधार्थियों, छात्र-छात्राओं और शिक्षकों का भी अभिनंदन किया।
जैव विविधता संरक्षण: मानव अस्तित्व का आधार
अपने व्याख्यान में बीएचयू के प्रो राजन कुमार गुप्ता ने वैश्विक और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानव जीवन का अस्तित्व पूरी तरह से प्रकृति और जीव-जंतुओं के संतुलन पर निर्भर करता है। प्रो. गुप्ता ने आगाह किया कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण आज दुनिया भर में पेड़-पौधों और जीवों की कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्होंने जोर दिया कि आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। जैव विविधता का संरक्षण केवल वैज्ञानिकों या सरकारों की ही नहीं, बल्कि हर नागरिक का मौलिक कर्तव्य है।
प्रकृति संरक्षण: हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी
प्रो. राजन कुमार गुप्ता ने जोर देकर कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल वैज्ञानिकों या सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का मौलिक कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण आज दुनिया भर में पेड़-पौधों और जीवों की कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। कार्यक्रम में उपस्थित सभी श्रोताओं को यह संदेश दिया गया कि प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर इसे निभाना होगा।
शोध और भविष्य के लिए नए दृष्टिकोण
उन्होंने वनस्पति विज्ञान के शोधकर्ताओं को ऐसे व्यावहारिक शोध करने की प्रेरणा दी जो पर्यावरण के सतत विकास में सहायक सिद्ध हों। प्रो. गुप्ता ने पृथ्वी के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए नए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्थानीय स्तर पर पौधों के संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उनका कहना था कि हमें सिर्फ समस्याओं की पहचान नहीं करनी, बल्कि उनके समाधान के लिए जमीनी स्तर पर काम भी करना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ सविता वर्मा ने की, जबकि डॉ गजेन्द्र प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य वक्ता प्रो राजन कुमार गुप्ता के बहुमूल्य समय और ज्ञानवर्धक व्याख्यान के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने विभागाध्यक्ष डॉ सविता वर्मा, डॉ अंकित कुमार सिंह, विभाग के अन्य सहकर्मियों, तकनीकी कर्मचारियों और बड़ी संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं तथा शोधार्थियों को भी कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया। इस महत्वपूर्ण व्याख्यान से विभाग के विद्यार्थियों और शोधार्थियों में Biodiversity Conservation और वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान की नई संभावनाओं को लेकर एक नई ऊर्जा का संचार हुआ। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें





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