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कुशेश्वरस्थान पूर्वी।
भोलुका पोखर स्थित श्मशान घाट पर खेल मैदान और पंचायत सरकार भवन के निर्माण का मामला विवाद का विषय बन गया है। मंगलवार को आसपास के गांवों की सैकड़ों महिलाओं और पुरुषों ने श्मशान घाट पर धरना देकर जोरदार नारेबाजी की। उन्होंने इस निर्माण के लिए जारी एनओसी (No Objection Certificate) को रद्द करने की मांग की।
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श्मशान घाट की पवित्रता का मुद्दा
- ग्रामीणों का कहना:
- भोलुका पोखर के चारों ओर बसे भरडीहा, खलासीन, भोलका, धरमपुर, गुलरिया, तरबन्ना सहित कई गांवों के लोग वर्षों से इस स्थल पर अपने मृतकों का अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं।
- ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मुखिया ने सीओ (Circle Officer) को गुमराह कर खेल मैदान और पंचायत सरकार भवन निर्माण के लिए एनओसी हासिल की है।
- सरकारी जमीन का सुझाव:
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में अन्य स्थानों पर पर्याप्त सरकारी जमीन उपलब्ध है, जहां निर्माण कार्य किया जा सकता है। लेकिन श्मशान घाट जैसे पवित्र स्थल पर निर्माण की अनुमति किसी भी हाल में नहीं दी जाएगी।
ग्रामीणों का विरोध और धरना
- धरने में भरडीहा, खलासीन, भोलका, धरमपुर, गुलरिया और तरबन्ना के सैकड़ों लोग शामिल हुए।
- लोगों ने चेतावनी दी कि वे श्मशान घाट की पवित्रता को नष्ट करने वाली किसी भी साजिश को सफल नहीं होने देंगे।
विधायक का हस्तक्षेप
स्थानीय विधायक अमन भूषण हजारी ने धरना स्थल पर पहुंचकर ग्रामीणों की बात सुनी।
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- आश्वासन दिया:
विधायक ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि श्मशान घाट पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं होगा। - धरना समाप्त:
विधायक के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए और अपने-अपने घर लौट गए।
निष्कर्ष
यह मामला क्षेत्रीय प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद की कमी और योजना के गलत चयन का नतीजा है। हालांकि, फिलहाल विवाद शांत हो गया है, लेकिन प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में श्मशान घाट जैसी पवित्र भूमि पर निर्माण को लेकर कोई विवाद न हो।

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