दरभंगा हत्याकांड: जीवन की नैया खेते एक ई-रिक्शा चालक के लिए महज 50 रुपए का विवाद काल बन गया। महज सात दिनों में पुलिस ने इस सनसनीखेज वारदात का पर्दाफाश कर एक नाबालिग को दबोचा है, जबकि दूसरा अभी भी फरार है।
दरभंगा हत्याकांड: 50 रुपए के लिए ई-रिक्शा चालक की हत्या, पुलिस ने 7 दिन में सुलझाई गुत्थी, एक नाबालिग गिरफ्तार
दरभंगा हत्याकांड: कैसे हुआ खुलासा और पकड़े गए आरोपी?
लहेरियासराय थाना क्षेत्र के कमर्शियल चौक, स्वीट होम के पास पीएचईडी के चतुर्थ वर्गीय स्टाफ परिचारी सह ई-रिक्शा चालक पवन कुमार प्रसाद की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। हत्या के सात दिन बाद पुलिस ने मामले का उद्भेदन करते हुए एक नाबालिग युवक को गिरफ्तार कर लिया है। दूसरे नाबालिग की गिरफ्तारी के लिए सघन छापेमारी जारी है। यह ई-रिक्शा चालक हत्याकांड मात्र 50 रुपए के विवाद में अंजाम दिया गया था, जहां दोनों नाबालिगों ने पवन के गले पर चाकू से वार कर उसकी जान ले ली और फरार हो गए।
हत्या की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी ने तत्काल थानाध्यक्ष अमित कुमार और डीआईयू सहित कई पुलिस पदाधिकारियों के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। सीसीटीवी फुटेज और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर इस मामले को सुलझाया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों नाबालिग आरोपी अहले सुबह दरभंगा स्टेशन से लहेरियासराय जाने के लिए पवन के ई-रिक्शा में बैठे थे। जब वे कमर्शियल चौक स्वीट होम के पास उतरे, तो चालक ने किराए के पैसे मांगे। विवाद तब शुरू हुआ जब दोनों युवकों ने 50 रुपए कम दिए। यह मामूली बहस जल्द ही खूनी संघर्ष में बदल गई, और एक युवक ने अपनी जेब से चाकू निकालकर पवन के गले पर जानलेवा वार कर दिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
घटना के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि ई-रिक्शा चालक सड़क पर ही गिर गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि थाना से महज 100 गज की दूरी पर हुई इस घटना की जानकारी पुलिस को दो-तीन घंटे बाद मिली। दोनों नाबालिग आरोपी लहेरियासराय थाना क्षेत्र के ही निवासी हैं। पुलिस अब इस बात की भी तहकीकात कर रही है कि आखिर वे रात को चाकू लेकर क्यों घूम रहे थे। हत्या करने के बाद उन्होंने चाकू को सैदनगर काली मंदिर स्थित तालाब में फेंक दिया था। बुधवार को पुलिस ने गोताखोरों की मदद से चाकू की तलाश करवाई, लेकिन सफलता नहीं मिली। दोनों आरोपियों के आपराधिक इतिहास को भी खंगाला जा रहा है।
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मृतक पवन कुमार प्रसाद का अतीत और पारिवारिक स्थिति
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच भेज दिया था। मृतक पवन के पास से बरामद मोबाइल में अंकित नंबरों पर संपर्क कर उसके रिश्तेदारों को सूचित किया गया। रिश्तेदारों ने पहचान कर बताया कि पवन कुमार प्रसाद पीएचईडी विभाग में चतुर्थ वर्गीय परिचारी के पद पर कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार, पवन को उनके पिता स्वर्गीय उमेश प्रसाद की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर यह नौकरी मिली थी। उनके एक पुत्र और एक पुत्री है। पत्नी से रिश्ते अच्छे न होने के कारण उनकी पत्नी अपने बच्चों के साथ दिल्ली में रह रही थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद अब वे सभी दरभंगा जिले के बहेड़ी थाना क्षेत्र स्थित सुसारी गांव आ गई हैं।
पवन कुमार प्रसाद का अतीत भी विवादों से भरा रहा है। गांव में हुई एक गोलीबारी की घटना में उनका नाम आया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें जेल भेज दिया था। लगभग तीन वर्ष तक वे जेल में रहे और विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया था। कुछ समय बाद उनका निलंबन तो वापस हो गया, लेकिन उन्हें निलंबन अवधि का वेतन नहीं दिया गया। इसी बात को लेकर वे आए दिन दो-तीन स्टाफ से झगड़ा कर लेते थे। वे मानवाधिकार और कोर्ट का भय दिखाकर निलंबन अवधि के वेतन की मांग कर रहे थे, लेकिन नियमानुसार उन्हें उस अवधि का वेतन नहीं दिया जा सकता था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
एक अजीब वाकया यह भी सामने आया कि पोस्टमार्टम विभाग में जब शव रखा हुआ था, तब एक मुस्लिम महिला स्वयं को पवन की पत्नी बताकर वहां आ गई थी। लेकिन उनकी वास्तविक पत्नी, पुत्र और पुत्री के आने के बाद से वह महिला लापता हो गई। पवन के पुत्र के आवेदन पर लहेरियासराय थाना में अज्ञात के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था, जिसकी गुत्थी पुलिस ने अब सुलझा ली है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

