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दरभंगा: पानी में डूबी किसानों की उम्मीदें, सड़ने लगी धान, रबी बुआई पर भी गहराया संकट

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कमतौल,दरभंगा, देशज टाइम्स: सोचिए, चार महीने तक कड़ी मेहनत से फसल तैयार की हो, और एक झटके में वो पानी में सड़ने लगे तो क्या बीतेगी? दरभंगा के कमतौल में इन दिनों किसान ठीक ऐसी ही मुश्किल से जूझ रहे हैं. खेतों में कमर भर पानी भरा है और उनकी मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा है.

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कमतौल के अहियारी चनुआटोल स्थित धोबहा चौर में जल निकासी की सही व्यवस्था न होने से करीब दो दर्जन से अधिक किसानों की मुश्किलें बेतहाशा बढ़ गई हैं. खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है, जिस कारण धान की कटनी लगभग असंभव सी हो गई है. ऐसे में खरीफ फसल के साथ-साथ अब आगामी रबी फसल की बुआई भी खतरे में पड़ती दिख रही है.

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जलजमाव में धान कटाई की जद्दोजहद

चौर में खेती करने वाले कई किसान किसी तरह धान की फसल काट कर घर लाने की जद्दोजहद में जुटे हैं. चनुआटोल के किसान उमेश राय ने बताया कि उन्होंने जैसे-तैसे टोपिया में धान काटा, लेकिन चार महीने की उनकी मेहनत एक झटके में बर्बाद हो गई. जो फसल तैयार थी, वह पानी में गिरकर सड़ने लगी है. उमेश कहते हैं कि अब जितना बचेगा, उसी से घर का गुजारा चलेगा.

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कई किसान तो खटिया और बेंच का सहारा लेकर पानी में खड़ी फसल काट रहे हैं. इसके बाद धान के बोझे को खलिहान तक ले जाया जाता है, जहां उसे खोलकर सुखाया जाएगा. फिर दौनी (थ्रेशिंग) की जाएगी. इतनी मशक्कत के बाद थोड़ा बहुत धान ही घर तक पहुंच पाता है. उमेश राय ने निराशा के बावजूद कहा कि प्रकृति के आगे सब बेबस हैं, पर उम्मीद नहीं छोड़ी है.

रबी फसल पर भी मंडराया संकट

उमेश ने यह भी बताया कि धान कटाई में देरी और खेतों में लगातार जलजमाव के कारण इस चौर में अब रबी की बुआई भी मुश्किल लग रही है. जमीन सूखे बिना जुताई संभव नहीं है. सामान्य तौर पर 15 नवंबर से रबी फसल की बुआई शुरू हो जानी चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए इस बार बुआई में एक महीने से अधिक की देरी होने की आशंका है.

खेतों में जमा पानी सूखने और जमीन को बुआई लायक तैयार होने में काफी समय लगेगा. यदि खेतों में अधिक नमी रही तो रबी फसल के उत्पादन पर इसका सीधा और नकारात्मक असर पड़ेगा, जिससे किसानों को दोहरा नुकसान झेलना पड़ सकता है.

मजदूर समस्या और प्रशासनिक उदासीनता

चनुआटोल के रविन्द्र पंडित ने बताया कि जलजमाव वाले खेतों में धान काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं. यदि मजदूर मिलते भी हैं, तो वे मनमानी मजदूरी मांग रहे हैं. यह समस्या वर्षों से चली आ रही है, लेकिन इस बार जलजमाव का स्तर और अधिक गंभीर हो गया है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द से जल्द चौर से जल निकासी की व्यवस्था नहीं हुई, तो धान के साथ-साथ रबी की फसल भी पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी.

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नंदकिशोर पंडित और रामसोगारथ पंडित सहित अन्य किसानों ने बताया कि धोबहा के अलावा तेलियाही और कुम्हरा चौरी में भी जलजमाव से किसानों की परेशानियां बढ़ी हुई हैं. जगह-जगह नालों की उड़ाही (सफाई) न होने के कारण पानी का स्वाभाविक प्रवाह रुक गया है, जिससे यह विकट स्थिति उत्पन्न हुई है.

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किसानों ने प्रशासन से तत्काल जलनिकासी की समुचित व्यवस्था कर खेतों को फिर से खेती योग्य बनाने की मांग की है, ताकि उन्हें भारी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके और उनकी आजीविका सुरक्षित रह सके.

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