Darbhanga Division Agriculture: बिहार के दरभंगा प्रमंडल में कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा के बाद जिलों के प्रदर्शन में बड़ा अंतर सामने आया है। प्रमंडलीय आयुक्त हिमांशु कुमार राय ने धीमी गति से चल रहे कार्यों पर सख्त निर्देश दिए हैं, जिसमें मृदा स्वास्थ्य कार्ड, पक्का वर्मी पिट और गोबर/बायोगैस इकाई जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं की उपलब्धि लक्ष्य से काफी कम पाई गई। किसानों के हित से जुड़ी इन योजनाओं में लापरवाही सामने आने के बाद आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को तेजी लाने और निर्धारित लक्ष्य को जल्द पूरा करने का आदेश दिया है।
कृषि योजनाओं की समीक्षा: कहां फिसड्डी, कहां बेहतर?
कृषि विभाग द्वारा की गई इस समीक्षा रिपोर्ट में तीन जिलों, दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर की योजनाओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया। जहां एक ओर मृदा स्वास्थ्य कार्ड और वर्मी पिट जैसी योजनाओं में कुछ जिलों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, वहीं आत्मा योजना के तहत प्रशिक्षण और किसान गोष्ठी जैसे कार्यक्रमों में तीनों जिलों ने भौतिक लक्ष्यों से बेहतर काम किया है। आयुक्त हिमांशु कुमार राय ने स्पष्ट किया कि किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


कृषि योजनाओं में धीमी गति वाले कार्यों में तेजी लाई जाए और निर्धारित लक्ष्य को शीघ्र पूरा किया जाए। – हिमांशु कुमार राय, आयुक्त, दरभंगा प्रमंडल
मृदा स्वास्थ्य कार्ड: समस्तीपुर ने बाजी मारी
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना में समस्तीपुर जिले ने दरभंगा और मधुबनी से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी मिट्टी के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देकर सही फसल और उर्वरक के चयन में मदद करना है।
| जिला | लक्ष्य (नमूने) | ऑनलाइन नमूने | प्रयोगशाला पहुंचे | जांच हुए नमूने | वितरित कार्ड |
|---|---|---|---|---|---|
| दरभंगा | 10,112 | 11,880 | – | 8,792 | 7,516 |
| मधुबनी | 11,798 | 11,798 | 10,950 | 9,685 | 7,789 |
| समस्तीपुर | 11,236 | 11,236 | 11,236 | 10,902 | 10,039 |
समस्तीपुर ने लक्ष्य के मुकाबले सबसे ज्यादा कार्ड वितरित किए हैं, जबकि दरभंगा और मधुबनी को कार्ड वितरण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। यह दर्शाता है कि समस्तीपुर में किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का लाभ पहुंचाने में अधिक सक्रियता दिखाई गई है।
वर्मी पिट और बायोगैस इकाई की धीमी रफ्तार
पक्का वर्मी पिट इकाई और गोबर/बायोगैस इकाई जैसी पर्यावरण-अनुकूल योजनाओं में भी जिलों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। वर्मी पिट के जरिए जैविक खाद बनाने को बढ़ावा दिया जाता है, जबकि बायोगैस इकाई ऊर्जा का स्वच्छ स्रोत प्रदान करती है।
| योजना | जिला | लक्ष्य (इकाइयां) | पूरी हुईं (इकाइयां) | वित्तीय उपलब्धि (लाख रु.) | प्रतिशत उपलब्धि |
|---|---|---|---|---|---|
| पक्का वर्मी पिट | दरभंगा | 788 | 39 | 1.95 | 4.95% |
| मधुबनी | 971 | 12 | 0.60 | 1.24% | |
| समस्तीपुर | 852 | 380 | 5.10 | 11.97% | |
| गोबर/बायोगैस इकाई | दरभंगा | 4 | 2 | – | – |
| मधुबनी | 5 | 0 | – | – | |
| समस्तीपुर | 4 | 0 | – | – |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दरभंगा और मधुबनी में वर्मी पिट और बायोगैस इकाई के निर्माण में काफी पिछड़ गए हैं, जबकि समस्तीपुर ने वर्मी पिट में कुछ बेहतर प्रदर्शन किया है। कमिश्नर ने इन योजनाओं में तत्काल सुधार का आदेश दिया है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों और पर्यावरण को इसका सीधा लाभ मिल सके।
आत्मा योजना में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन
आत्मा योजना के तहत किसानों को प्रशिक्षण, परिभ्रमण, जिला स्तरीय प्रदर्शनी और किसान गोष्ठी जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य किसानों को नई कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं से अवगत कराना है। खुशी की बात यह है कि इस मद में तीनों जिलों ने निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक भौतिक उपलब्धि दर्ज की है। दरभंगा में लक्ष्य 19,689 के मुकाबले 52,905, मधुबनी में 23,136 के मुकाबले 42,777 और समस्तीपुर में 21,957 के मुकाबले 42,341 की भौतिक उपलब्धि रही। वित्तीय उपलब्धि भी लक्ष्य से अधिक पाई गई। यह दर्शाता है कि किसानों के बीच जागरूकता फैलाने के प्रयासों में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। आगामी समय में अन्य कृषि योजनाओं की धीमी प्रगति पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि किसानों को सभी लाभ समय पर मिल सकें।







