
Road Accident: दरभंगा के अलीनगर में एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने एक हंसते-खेलते परिवार को मातम में बदल दिया है। 26 वर्षीय ब्रह्मानंद मिश्रा की आकस्मिक मौत ने न केवल उनके बूढ़े माता-पिता से इकलौता सहारा छीन लिया है, बल्कि उनकी गर्भवती पत्नी और तीन साल की बेटी के भविष्य पर भी गहरा संकट खड़ा कर दिया है।
अलीनगर थाना क्षेत्र के पकड़ी गांव निवासी ब्रह्मानंद मिश्रा (26) की शुक्रवार को दरभंगा के पारस हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। यह खबर सुनते ही उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। तीन साल की बेटी काव्या ने पिता का साया खो दिया, तो वहीं मृतक की गर्भवती पत्नी काजल देवी के गर्भ में पल रहा बच्चा दुनिया में आने से पहले ही अपने पिता को देख पाने से वंचित रह गया। 70 वर्षीय लकवाग्रस्त पिता उदित नारायण मिश्रा और 65 वर्षीय माता इंदिरा देवी भी पूरी तरह से असहाय महसूस कर रहे हैं, जिनकी आंखें आंसू बहाते-बहाते सूख गई हैं। विधवा काजल देवी बार-बार बेहोश हो रही हैं और उनके जुबान पर सिर्फ यही आ रहा है, “अब जिंदगी कैसे कटैगी, कौन देखेगा अब हमें।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
सड़क दुर्घटना का भयानक मंजर और इलाज का संघर्ष
गत 6 मई की शाम ब्रह्मानंद मिश्रा अपने दो दोस्तों के साथ गांव से गुजरने वाले आशापुर-अलीनगर एसएच 88 मुख्य मार्ग पर बसवा चौक के पास घूमने गए थे। उसी दौरान तेज रफ्तार इनोवा कार ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और भाग निकली। यह सड़क दुर्घटना इतनी भयानक थी कि इनोवा के साइड मिरर से टकराकर ब्रह्मानंद मुख्य सड़क पर गिर गए, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई और अत्यधिक खून बहने लगा। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार का साइड मिरर भी टूटकर सड़क पर गिर गया था। घटना के बाद उनके साथी तुरंत उन्हें उठाकर बेनीपुर के एक निजी अस्पताल ले गए, लेकिन गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद, परिजनों और रिश्तेदारों ने मिलकर उन्हें दरभंगा के पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहाँ शुक्रवार को उन्होंने जीवन की जंग हार दी। बाद में डीएमसीएच में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई और शव को गांव लाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। घटना को लेकर मृतक के पिता ने स्थानीय थाना में आवेदन दिया है।
ब्रह्मानंद अपने चचेरे भाई की शादी में शामिल होने के लिए गांव आए थे, जो 30 अप्रैल को संपन्न हुई थी। उन्हें 9 मई को वापस नोएडा लौटना था, जहां वे एक निजी कंपनी में मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे।
परिवार पर दुखों का पहाड़: एक के बाद एक तीन भाइयों की मौत
इस परिवार पर यह पहली मुसीबत नहीं है, बल्कि यह एक गहरी पारिवारिक त्रासदी है। ब्रह्मानंद तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाई दुर्गानंद मिश्रा की मृत्यु भी करीब 15 साल पहले एक असाध्य रोग से हो गई थी। वे नोएडा में मजदूरी करते थे और उनकी कोई संतान नहीं थी। इसके बाद, उनके मझले भाई परमानंद मिश्रा की मृत्यु पिछले साल हरियाणा के पानीपत में एक सड़क दुर्घटना में ही हो गई थी। उनकी विधवा अभी भी पानीपत में मजदूरी कर अपने दो बच्चों का पालन-पोषण कर रही हैं। ब्रह्मानंद ही अपने बूढ़े माता-पिता के लिए एकमात्र सहारा बचे थे, जिनकी दुखद मृत्यु ने उन्हें पूरी तरह से अकेला कर दिया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
ब्रह्मानंद की शादी करीब पांच साल पहले बिरौल प्रखंड के पघारी गांव निवासी कन्हैया मिश्र की पुत्री काजल देवी से हुई थी। उनकी एकमात्र तीन वर्षीय पुत्री काव्या है और काजल देवी गर्भवती हैं। इस दुखद घटना ने इस परिवार को ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है, जहाँ उनके सामने भविष्य अंधकारमय दिख रहा है।






