Darbhanga Sawan: सावन के पवित्र महीने की पहली सोमवारी पर दरभंगा भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। जिले के विभिन्न शिवालयों में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दो अगस्त की देर रात से ही श्रद्धालु गौतमाश्रम के सप्तकुंड से पवित्र जल लेकर मंदिरों की ओर प्रस्थान करने लगे, जिससे पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा।







जाले प्रखंड में स्थित पौराणिक गौतमाश्रम के सप्तकुंड, जो ब्रह्मपुर पश्चिमी पंचायत में है, से जल भरने के लिए भक्तों की भारी भीड़ लगी रही। यहीं से जल लेकर कांवरिये रतनपुर के गंगेश्वरनाथ, जाले के मनमा स्थित मानेश्वरनाथ, मधुबनी जिले के विस्फी प्रखंड में स्थित बैरवा महादेव और सिंघवाड़ा के बटेश्वरनाथ जैसे प्रमुख शिवालयों की ओर बढ़े। मुख्य सड़कों पर कांवरियों की लंबी कतारों के कारण वाहनों की रफ्तार भी धीमी पड़ गई, जिससे भक्तिमय माहौल और भी गहरा गया।
गंगेश्वरनाथ मंदिर में अलसुबह से भक्तों की भीड़
रतनपुर के गंगेश्वरनाथ मंदिर में सोमवार अलसुबह करीब तीन बजे पंडा मनोज कुमार झा ने विधि-विधान से बाबा की आरती की। इसके तुरंत बाद मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। न्यास समिति के सदस्यों और पुलिस प्रशासन की कड़ी निगरानी में भक्तों ने कतारबद्ध होकर शांतिपूर्वक भगवान शिव का जलाभिषेक किया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेटिंग की विशेष व्यवस्था की गई थी। मंदिर परिसर में पूजा सामग्री, खिलौने, मिठाई, नाश्ता और अन्य आवश्यक वस्तुओं की अस्थायी दुकानें भी सजी थीं, जहां दिनभर चहल-पहल बनी रही।
जल संकट के बावजूद मनमा महादेव में आस्था का सैलाब
जाले के प्रसिद्ध मनमा महादेव मंदिर में भी सुबह से ही जलाभिषेक और दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। जाले सहित आसपास के करीब 10 गांवों से हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और पूरी आस्था के साथ पूजा-अर्चना की। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोलबम’ के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। मंदिर परिसर में मेले का भी आयोजन किया गया था, जिसने भक्तों के उत्साह को और बढ़ा दिया।
मनमा महादेव मंदिर के अध्यक्ष सुरेश प्रसाद ने बताया, “इस वर्ष पिछले वर्षों की तुलना में अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं। पूजा-अर्चना की सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से की गई थीं और श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक दर्शन-पूजन किया।” उन्होंने जल संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “मंदिर के समीप स्थित तालाब सूख गया है, लेकिन श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पास के निजी नलकूप से तालाब में पानी भरवाया जा रहा है।”
जल संकट की चुनौती के बावजूद, स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति ने मिलकर भक्तों की सुविधा के लिए प्रभावी कदम उठाए। निजी नलकूप से तालाब में पानी भरकर जलाभिषेक की व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जिससे आस्था के इस महापर्व में कोई बाधा नहीं आई। सावन की पहली सोमवारी का यह सफल आयोजन आने वाले सोमवारियों के लिए भी एक उत्साहवर्धक संकेत है।









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