
Darbhanga school irregularities: दरभंगा के बेनीपुर स्थित सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था का हाल ऐसा है कि बच्चे स्कूल तो आते हैं, लेकिन उन्हें खाली क्लासरूम और नदारद शिक्षक मिलते हैं। हाजिरी रजिस्टर में सब ‘चंगा सी’, लेकिन हकीकत में शिक्षा का मंदिर बदहाल है। अब जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अख्तियार किया है।
डीईओ का औचक निरीक्षण और दरभंगा स्कूल अनियमितताएं
दरभंगा जिले के बेनीपुर प्रखंड स्थित शिवराम माध्यमिक एवं मध्य विद्यालय में व्याप्त कुव्यवस्था का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बच्चों की शिक्षा के प्रति गंभीर खिलवाड़ को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी विद्यानंद ठाकुर ने स्वयं मोर्चा संभाला। उन्होंने इन दोनों विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान छात्रों की उपस्थिति बेहद कम पाई गई और महत्वपूर्ण अभिलेख भी समुचित तरीके से उपलब्ध नहीं थे। इन दरभंगा स्कूल अनियमितताएं पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्रधानाध्यापकों सहित संबंधित शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा है।
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गैरहाजिर शिक्षक और बदहाल शिक्षा व्यवस्था की पोल खुली
निरीक्षण में कई हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। शिवराम माध्यमिक विद्यालय में नामांकित 175 छात्रों में से केवल 21 छात्र उपस्थित थे। इससे भी गंभीर बात यह थी कि प्रधानाध्यापिका बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाई गईं, जबकि शिक्षक एहसानुल हक हाजिरी लगाकर नदारद थे। विद्यालय परिसर में साफ-सफाई की भी घोर कमी देखने को मिली। दो शिक्षिकाएं, प्रीति कुमारी और प्रतिभा कुमारी, विद्यालय अवधि में अपने बच्चों को साथ लेकर आ रही थीं, जिससे शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा था। इस शिक्षक अनुपस्थिति और अव्यवस्था को लेकर उनसे भी जवाब तलब किया गया है।
इसी तरह, मध्य विद्यालय में नामांकित 629 छात्रों में से केवल 65 छात्र मौजूद थे, और 24 शिक्षकों में से मात्र 12 ही उपस्थित पाए गए। प्रधानाध्यापक पर एक साथ दो वर्गों का संचालन करने का आरोप भी लगा है, जो उनकी कार्यप्रणाली में लापरवाही को दर्शाता है।
जवाब तलब और आगे की कार्रवाई की तैयारी
डीईओ विद्यानंद ठाकुर ने दोनों विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और अनुपस्थित पाए गए शिक्षकों से तीन दिनों के अंदर साक्ष्य आधारित जवाब मांगा है। यह स्पष्टीकरण उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार बन सकता है। इन गंभीर अनियमितताओं ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं, खासकर तब जब बच्चों का भविष्य इससे सीधा जुड़ा है।
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