

Bihar Board Exam: समय का पहिया कभी-कभी ऐसा भी घूमता है कि एक मिनट की देरी जिंदगी का पूरा साल ले डूबती है। भविष्य की उड़ान भरने को तैयार एक छात्रा के साथ ऐसा ही कुछ दरभंगा में हुआ, जहाँ बिहार इंटरमीडिएट की परीक्षा में महज एक मिनट की देरी से उसे पूरे साल की मेहनत का फल नहीं मिल पाया।
Bihar Board Exam: दरभंगा में 1 मिनट की देरी ने छात्रा का भविष्य छीना, आक्रोशित अभिभावकों ने किया हंगामा
सोमवार से शुरू हुई बिहार बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा के पहले दिन दरभंगा में एक हृदय विदारक घटना सामने आई। आरूषी कुमारी नामक छात्रा अपनी परीक्षा देने पहुंची, लेकिन प्रवेश द्वार बंद कर दिया गया था। वह बार-बार गुहार लगाती रही, “सर, सर गेट खोल दीजिए नहीं तो मेरा एक साल बर्बाद हो जाएगा। सर प्लीज अंदर आने दीजिए। मात्र एक मिनट लेट हुआ है, सर प्लीज।” लेकिन परीक्षा विभाग के कड़े परीक्षा नियम और स्कूल प्रबंधन की मजबूरी के आगे उसकी एक न चली। गेट खोलने से साफ इनकार कर दिया गया। आरूषी रो-रोकर अंदर जाने की मिन्नतें करती रही, लेकिन उसकी सुनने वाला कोई नहीं था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। छात्रा को परीक्षा से वंचित देख मौके पर मौजूद कुछ अन्य छात्र और अभिभावक आक्रोशित हो गए। उन्होंने कुछ देर के लिए सड़क को भी जाम कर दिया, हालांकि लहेरियासराय थाना पुलिस ने सड़क जाम की घटना से इनकार किया है।
Bihar Board Exam: एक मिनट की देरी और टूट गए सपने
आरूषी ने बताया कि वह बहेड़ी थाना क्षेत्र के समधपुरा गाँव की रहने वाली है। वह अपने पिता अरविंद कुमार सिंह के साथ बाइक से गाँव से दरभंगा स्थित परीक्षा केंद्र पर आई थी। उसने बताया कि शहर में भारी यातायात जाम के कारण उन्हें केंद्र तक पहुँचने में केवल एक मिनट की देरी हो गई। इस मामूली देरी के कारण उसे परीक्षा देने से रोक दिया गया, लाख अनुनय-विनय के बाद भी उसे प्रवेश नहीं मिला।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
यातायात जाम या सिस्टम की सख्ती: किसकी गलती?
यह घटना जीएन गंज स्थित रोज पब्लिक स्कूल में घटित हुई, जहाँ उत्क्रमित मध्य विद्यालय समधपुरा का सेंटर दिया गया था। समय पर नहीं पहुँचने के कठोर परीक्षा नियम के चलते आरूषी को अपनी सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा से वंचित होना पड़ा। यह सिर्फ एक आरूषी की कहानी नहीं, बल्कि ऐसे कई छात्रों की व्यथा है जो कभी यातायात की समस्या तो कभी नियम की सख्ती का शिकार हो जाते हैं।
इतना ही नहीं,पहले सिटिंग में एम एल एकेडमी स्कूल में भी एक छात्र सहित तीन बच्चे को प्रवेश नहीं करने दिया गया गेट बंद हो जाने के बाद।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या परीक्षा नियमों में थोड़ी मानवीय संवेदना का समावेश नहीं होना चाहिए, खासकर जब देरी मात्र एक मिनट की हो और उसकी वजह अप्रत्याशित यातायात जाम हो? इस घटना ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था में लचीलेपन और मानवीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बहस छेड़ दी है।
देशज टाइम्स सभी छात्रों एवं अभिभावक से अनुरोध करता है कि परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचे ताकि किसी का परीक्षा नहीं छूटे।


