
Unseasonal Rain: मई के महीने में आमतौर पर सूरज आग उगलता है, लेकिन दरभंगा के जाले प्रखंड में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। बेमौसम बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, जिससे उनकी चिंताएं बढ़ गई हैं।
जाले प्रखंड में 21 मई को हुई बारिश और बूंदाबांदी के बाद शुक्रवार को भी आसमान में बादल छाए रहे। इस बदले हुए मौसम ने जहां एक ओर वातावरण को सुहावना बनाया है, वहीं दूसरी ओर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। किसान बता रहे हैं कि यह Unseasonal Rain उनकी खेती और फसल चक्र को बुरी तरह प्रभावित कर रही है।
Unseasonal Rain का खेती पर बुरा असर
प्रगतिशील किसान प्रेम कुमार धीर, भोला प्रसाद सिंह, गोपीकृष्ण ठाकुर, धर्मेन्द्र ठाकुर, राज सिंघानिया, विजय दास और राजा सहनी ने बताया कि मौजूदा समय में किसान अपने खेतों की गहरी जुताई कर मिट्टी पलटने का काम करते हैं। इस प्रक्रिया से खर-पतवार की जड़ें ऊपर आ जाती हैं और तेज धूप में सूखकर नष्ट हो जाती हैं। इसके साथ ही मिट्टी के भीतर छिपे कीट भी बाहर निकल आते हैं, जिन्हें या तो पक्षी खा लेते हैं या वे धूप में मर जाते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। हालांकि, लगातार हो रही बारिश और बदले मौसम के कारण खेतों की मिट्टी नरम हो गई है, जिससे गहरी जुताई का महत्वपूर्ण कार्य ठप पड़ गया है।
मूंग की फसल और आगामी खेती पर संकट
किसानों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि इस बदले मौसम से खेतों में लगी मूंग की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। नरम मिट्टी के कारण जुताई नहीं हो पा रही है और कीट-खरपतवार की समस्या बढ़ने का डर है। यदि मौसम का यह मिजाज यूं ही बना रहा, तो आने वाली खेती की तैयारी पर भी इसका गंभीर असर पड़ सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। किसानों का कहना है कि सरकार को इस स्थिति पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें इस प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपाई में मदद करनी चाहिए। यह Unseasonal Rain सिर्फ आज की फसल को ही नहीं, बल्कि भविष्य की कृषि योजनाओं को भी प्रभावित कर रही है। इस गंभीर समस्या पर स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग को तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।
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