Darbhanga Urs News: सूफी मत के महान संत हजरत मखदूम भीखा शाह सैलानी रहमतुल्लाह अलैह का 377वां सालाना उर्स मुबारक रविवार को बड़े ही अकीदत और एहतराम के साथ शुरू हो गया है। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत भटियारी सराय (मिश्रटोला), दिग्घी तालाब स्थित दरगाह शरीफ में अकीदतमंदों का तांता लग गया है। इस दौरान बड़ी संख्या में जायरीन अपनी फरियाद और मन्नतें लेकर पहुंचने लगे।
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Darbhanga Urs News: मिथिलांचल की गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक
मिथिलांचल में यह प्रसिद्ध सूफी दरगाह हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की एक बेमिसाल मिसाल मानी जाती है। हर वर्ष बकरीद की 13वीं से 17वीं तारीख तक उर्स का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी यह पांच दिवसीय उर्स 31 मई से 4 जून तक मनाया जाएगा। मिथिलांचल के विभिन्न जिलों के साथ-साथ पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में जायरीन और अकीदतमंद इस उर्स में शिरकत करने पहुंचते हैं।
लोगों की यह गहरी आस्था है कि इस दरगाह पर सच्चे दिल से मांगी गई हर दुआ कबूल होती है। यही वजह है कि मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु यहां चादर पेश कर अपनी अकीदत का इज़हार करते हैं। यह उर्स क्षेत्र की समृद्ध गंगा-जमुनी तहजीब, सूफी परंपरा और सामाजिक सौहार्द का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।
उर्स में होते हैं विशेष अनुष्ठान और दुआएं
दरगाह के खादिम शाह मोहम्मद शमीम ने बताया कि पांच दिवसीय उर्स का समापन 4 जून को होगा। समापन के दिन सुबह मजार शरीफ पर गुस्ल की रस्म अदा की जाएगी। इसके बाद खादिमों की जानिब से चादरपोशी, गुलपोशी तथा सूफियाना कव्वाली का आयोजन किया जाएगा।
मीलाद शरीफ की महफिल सजाई जाएगी और अंत में मुल्क में अमन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की जाएगी। उर्स के अवसर पर दरगाह परिसर को भव्य ढंग से सजाया गया है और जायरीन की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
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यह सालाना उर्स न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक बड़ा माध्यम भी है, जो पूरे क्षेत्र में शांति और प्रेम का संदेश फैलाता है।







