अलीनगर सरकारी योजना: लाखों फूंके, कचरा प्लांट पर लटका है ताला, जनता का फूटा गुस्सा
अलीनगर सरकारी योजना: यह कैसी सरकारी योजना है जो सिर्फ भवन बनाने तक ही सीमित रह गई है, जबकि आम जनता को इससे कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है? अलीनगर प्रखंड में लोहिया स्वच्छता मिशन के तहत लाखों रुपये खर्च कर कचरा निष्पादन इकाई तो बनाई गई, लेकिन आज तक उनका ताला नहीं खुला। जनता की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
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लाखों खर्च, फिर भी प्लांट निष्क्रिय क्यों?
अलीनगर सरकारी योजना के तहत प्रत्येक पंचायत में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए। सरकार ने पंचायतों को स्वच्छ और सुंदर बनाने का सपना दिखाया था, जिसमें कचरा उठाव और गीले कचरे से खाद निर्माण की बात कही गई थी। किसानों को सस्ते दामों पर वर्मी कंपोस्ट मिलने से रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होनी थी, लेकिन यह योजना धरातल पर पूरी तरह विफल साबित हो रही है।
प्रखंड के मोहिउद्दीनपुर पकरी पंचायत में एसएच88 सड़क के किनारे कमला नदी के तट पर कचरा निस्तारण के लिए बनाया गया भवन लगभग एक साल से अधिक समय से बनकर तैयार है। 7,50,000 लाख रुपये की लागत से बना यह प्लांट आज भी ताले में बंद है। मुख्य सड़क से नीचे होने के कारण इसे मनरेगा के तहत लाखों रुपये खर्च कर मिट्टी भराई कर सड़क के बराबर बनाया गया था, फिर भवन निर्माण हुआ, लेकिन उद्घाटन आज तक नहीं हुआ।
जनता की उम्मीदें टूटी, हर ओर गंदगी का अंबार
जहां भी यह प्रसंस्करण इकाई बनी हुई है, वहां से न तो कचरे का उठाव होता है और न ही किसी पंचायत में साफ-सफाई का कार्य किया जाता है, जिससे सभी जगह गंदगी का अंबार दिखाई देता है। यह स्थिति अलीनगर सरकारी योजना की गंभीरता पर सवाल खड़े करती है। लोगों को लगा था कि इस योजना से पंचायतों में कुछ अवश्य दिखाई देगा, लेकिन शुरुआत के साथ ही यह प्रखंड क्षेत्र में पूरी तरह से विफल साबित हुई है।
अधिकारियों की अनदेखी और करोड़ों की बर्बादी
यही हाल हरसिंहपुर पंचायत में भी बने अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई के भवन का है, जहां किसी भी प्रकार का कचरा निस्तारण का कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है। पंचायतों द्वारा इन योजनाओं पर लाखों रुपये खर्च कर सिर्फ खानापूर्ति की गई है। मोहिउद्दीनपुर पकरी पंचायत का यह भवन मुख्य सड़क के किनारे होने के बावजूद, प्रखंड के अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है।
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यह कैसी विडंबना है कि सरकार विकास का दावा करती है, लेकिन धरातल पर उसकी योजनाएं दम तोड़ रही हैं। इन अनुपयोगी प्लांट्स के कारण न केवल जनता का पैसा बर्बाद हो रहा है, बल्कि स्वच्छता का सपना भी अधूरा रह गया है। अब देखना यह है कि अधिकारी कब इस ओर ध्यान देते हैं और इन लाखों के प्लांट्स पर से ताला हटता है।







