
बाल तस्करी: झारखंड के देवघर जिले से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां रेलवे पुलिस ने बाल तस्करी की एक बड़ी कोशिश को नाकाम कर दिया है। मधुपुर रेलवे स्टेशन पर दरभंगा-हावड़ा एक्सप्रेस से 4 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया गया, जिनके बाल तस्करों के चंगुल में होने की आशंका है।
देवघर जिले के मधुपुर रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दरभंगा-हावड़ा एक्सप्रेस से चार नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया। प्रारंभिक जांच में इन बच्चों के बाल तस्करी का शिकार होने की आशंका जताई जा रही है।
आरपीएफ की तत्परता और आगे की कार्रवाई
आरपीएफ की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्चों को अपनी सुरक्षा में लिया। इसके बाद, चाइल्डलाइन के सहयोग से उन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जो अब बच्चों की देखरेख और पुनर्वास के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है। हालांकि, इस कार्रवाई के दौरान बाल तस्कर गिरोह के सदस्य मौके से फरार होने में सफल रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
बाल तस्करी: बढ़ते मामले और जागरूकता की जरूरत
गौरतलब है कि इन दिनों रेल मार्ग के जरिए बच्चों की बाल तस्करी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। तस्कर मासूम बच्चों को बहला-फुसलाकर या झांसा देकर दूसरे शहरों में ले जाने की कोशिश करते हैं। रेलवे सुरक्षा बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ऐसे मामलों में बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। बीते दिनों भी जसीडीह रेलवे स्टेशन से 13 नाबालिग बच्चों को रेस्क्यू किया गया था, जबकि जामताड़ा स्टेशन से सात बच्चों को सुरक्षित निकाला गया था। इन सभी मामलों में बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौंपा गया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
इस घटना पर आश्रय संस्था की सचिव दीपा कुमारी ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि बाल तस्करी एक गंभीर अपराध है और इसके खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। दीपा कुमारी ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों पर विशेष ध्यान दें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
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