दरभंगा, देशज टाइम्स अपराध ब्यूरो। एपीएम थाना क्षेत्र के अनार कोठी से रामभद्रपुर जाने वाली तीन बटिया रास्ते पर दिन दहाड़े हुई हत्या ने पुलिस पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया हैं।
शहर में लगातार हत्याएं हो रही हैं। लेकिन, इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं। ऐसा प्रतीत होता है कि सभी पुलिस वाले काम करने की बजाए अपनी अपनी कुर्सी संभालने में लगे हैं। रात्रि गश्ती, दिवा गश्ती, वाहन चेकिंग आदि रोजमर्रा के कार्यकलाप भी सही तरीके से पुलिस नहीं कर रही हैं।






अपराधियों को तलाशना या जानकारी जुटाना या फिर जानकारी लेकर उस पर काम करना यह पुलिस की नीयत में नहीं हैं। हालांकि रामभद्रपुर के पूर्व मुखिया उज्जवल कुमार के छोटे भाई अविनाश कुमार झा उर्फ विशाल आपराधिक चरित्र का था। कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।
हाल के दिनों में ही वह जेल से बाहर आया था। और शांति प्रिय जीवन जी रहा था। इस घटना के बाद पुलिस अपने स्तर से अपराधियों का सुराग लगाने में जुटी हैं। लेकिन असफल है। जबकि घटना के कुछ घंटे बाद तकनीकी सेल के पदाधिकारी और डॉग स्कावयर की टीम भी घटना स्थल पर पहुंच गई। फोरेंसिक टीम भी पहुंची हुई है।
सभी अपने-अपने तरीके से जांच कर रही है। इन सबों में एक बात नजर आ रही है। और ऐसा लग भी रहा है कि पुलिस का यह कुत्ता प्रशिक्षत है या किसी से मांगकर वहां ले जाया गया है? क्योंकि कुत्ते को एक चप्पल सूंघाकर छोड़ा गया तो एक शिक्षक के घर जाकर वह बैठ गया। वह शिक्षक निहायत ही शरीफ हैं। पूर्व मुखिया उज्जवल से दोस्ती भी है। हालांकि दोस्ती में भी दुश्मनी होती है, लेकिन यहां ऐसी बात नहीं दिख रही है।
तकनीकी सेल के अधिकारियों का कार्य हमेशा से सराहनीय रहा है। कई बड़े-बड़े मामलों का उद्भेदन किया है। इनके उद्भेदन के चलते पदाधिकारी सुस्त हैं। अब इस हत्या को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ साल पहले विशाल को अपराधियों ने गोली मारी थी। लेकिन वह गोली उसके पैर में लगी थी।
कहीं उस वक्त चलाई गई गोली में विशाल की हत्या करना मकसद तो नहीं था। कहीं वहीं लोग मौका पाकर विशाल की हत्या तो नहीं कर दी। विशाल के जब्त मोबाइल को खंगालने से भी पुलिस को पता चल सकता है।
अब एक सवाल यह भी हैं कि पुलिस अपना नेटवर्क क्यों नहीं बढ़ाती। जिले में एक दो थानाध्यक्ष को छोड़ कोई भी थानाध्यक्ष अपना नेटवर्क बनाने में विश्वास नहीं रखते। इसी का नतीजा हैं कि घटना घटने के बाद मौके पर पहुंचकर कहती है, मामले में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और अपराधी पकड़े जाएंगे। पर जो पुलिस का वास्तविक स्टाइल हैं वह भूल चुकी हैं।
थानेदार फोन नहीं उठाते हैं तो सूचना देने वाला भी घर बैठ जाता है। कई वरीय पदाधिकारी कार्यालय नहीं आते हैं। कई फोन नहीं उठाते?
फिर कैसे होगा अपराध मुक्त बिहार! पुलिस की कार्यशैली ही बिहार को अपराध मुक्त कर सकता है। इसके लिए तत्पर होना जरूरी है। इसका घोर अभाव है।







