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दरभंगा Radiance Classes के निदेशक Captain Ashutosh Kumar Jha ने कहा- IIT को बिहार के बच्चों की जरूरत नहीं, नहीं दिया जेईई देने का मौका

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मुख्य बातें
आईआईटी को बिहार के बच्चों की जरूरत नहीं, नहीं दिया जेईई देने का मौका
– हेल्पलाइन से भी नहीं मिल रहा समाधान
– इमेल पर मिले आश्वासन से बंधी उम्मीद भी टूटी

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संजय कुमार राय दरभंगा, देशज टाइम्स। अगर कोई विद्यार्थी दसवीं के बाद गणित विषय का चुनाव करता है तो मन में आईआईटी जाकर पढ़ने का सपना जरूर रहता हीं है। यह सफर इतना आसान नहीं होता। बच्चों को जेईई की परीक्षा में रैंक लाने होते हैं और साथ हीं बारहवीं बोर्ड की परीक्षा में कम से कम 75 फिसदी अंक लाने होते हैं। इससे यह तो स्पष्ट है कि कड़ी प्रतिस्पर्धा है साथ हीं मेहनती और होशियार बच्चे ही इन मापदंड़ों को पूरा कर सकते हैं।

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लेकिन, आईआईटी जेईई की परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था एनटीए ने इस बार यह मौका बिहार बोर्ड से बारहवीं की पढ़ाई कर रहे बच्चों को नहीं दिया है। दरअसल, हुआ यह कि बिहार बोर्ड के बारहवीं के बोर्ड की गणित विषय की परीक्षा एक फरवरी को थी।

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इसी दिन इन बच्चों की जेईई की परीक्षा भी एनटीए ने रख दी थी। इस कारण सभी विद्यार्थियों ने केवल बोर्ड की परीक्षा हीं दी। एनटीए की कुव्यवस्था का आलम यह था की इन बच्चों की परीक्षा भी उसी पाली में रखी गयी थी जिस समय उनका बोर्ड का पेपर था, जबकि दूसरी पाली में परीक्षा रहने पर यह सभी परीक्षार्थी परीक्षा दे सकते थे।

 

ऐसा भी नहीं है कि एनटीए को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। बल्कि अनेंकों छात्रों ने एनटीए को कॉल और इमेंल से इसकी न सिर्फ जानकारी दी थी बल्कि परीक्षा का दिन बदलने की गुहार भी लगायी गयी थी।

 

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ऐसे हीं, एक छात्र सौरभ कुमार ने बताया कि बोर्ड की ओर से पहले परीक्षा की तिथी व परीक्षा केंद्र की जानकारी दे दी गयी थी. बाद में परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी किया गया था। सौरभ ने बताया कि एडमिट कार्ड जारी करने के पहले मैंने इमेल से जानकारी भेज दी थी और आश्वासन भी मिला था। लेकिन एडमिट कार्ड आने पर भी कोई परिवर्तन नहीं था। फिर से फोन व इमेल से संपर्क किया लेकिन अंततः जेईई देने का मौका हाथ से निकल गया.

रेडिएंस क्लासेज (Radiance Classes) के डायरेक्टर कैप्टेन आशुतोष कुमार झा (Captain Ashutosh Kumar Jha) ने बताया कि आईआईटी जेईई के नोटिफिकेशन में 31 जनवरी तक ही परीक्षा की तीथि घोषित की गई थी. लेकिन जब बच्चों को उनके परीक्षा तिथी की जानकारी दी गयी तो उसमें एक फरवरी को भी परीक्षा बताया गया था।

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इसमें बिहार बोर्ड के बारहवी के हीं ज्यादातर छात्रों की परीक्षा रख दी गयी थी. हालांकि कुछ छात्रों की परीक्षा पहली ही तिथी को हो गयी। लेकिन ज्यादातर छात्र जेईईई की परीक्षा नहीं दे सके। जबकि बिहार बोर्ड के सचिव ने भी एनटीए को पत्र लिखकर इस मामले की जानकारी दी थी। लेकिन इसका भी कुछ प्रभाव नहीं दिखा।

 

उन्होंने बताया कि पिछले साल भी नार्थ-इस्ट के कुछ इलाके के बच्चे बाढ़ के कारण जेईई की परीक्षा नहीं दे सके थे. एनटीए ने बाद में अलग से उन बच्चों के लिए परीक्षा आयोजित की थी। अब अगर ऐसा कुछ कदम एनटीए ने उठाया तभी बिहार के बच्चों को मौका मिल सकता है। नहीं तो केवल अप्रैल की परीक्षा के आधार पर ही बच्चों को आईआईटी जाने के लिए संघर्ष करना होगा।

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