बिहार और झारखंड के तीस जिलों में 5 सालों तक जलवायु अनुकूल कृषि के लिए रूपरेखा तैयार, दरभंगा और जाले के जोगियारा गांव का चयन, चमकेंगे किसानों के किस्मत, पढ़िए पूरी खबर
बिहार और झारखंड के तीस जिलों में 5 सालों तक जलवायु अनुकूल कृषि के लिए रूपरेखा तैयार, दरभंगा और जाले के जोगियारा गांव का चयन, चमकेंगे किसानों के किस्मत, पढ़िए पूरी खबर
- Advertisement -
जाले कृषि विज्ञान केंद्र में भारत सरकार संपोषित राष्ट्रीय नवेन्वेषण जलवायु अनुकूल तकनीक विषय पर अंतर्राजीय कार्यशाला का आयोजन अटारी पटना की (5 years in thirty districts of Bihar and Jharkhand) ओर से किया गया।
इस अधिवेशन में वैज्ञानियों ने निर्णय किया कि बिहार और झारखंड के तीस 30 जिलों में जलवायु अनुकूल कृषि परियोजना से किसानों को राष्ट्रीय अंतर रार्ष्ट्रीय स्तर पर फलक प्रदान किया जाएगा। इससे अबतक हुए अनुसंधान परिणामों के ज्ञान स्थानीय स्तर पर किसानों को मिल सकेंगे। साथ ही, हो रहे जलवायु परिवर्तन किसानों और खेती के नकारात्मक प्रभाव को कम करके किसानों के आय और फसल उत्पादन के बढ़ावा में मदद मिलेगा।
अटारी पटना के निर्देशक डॉ. अंजनी कुमार ने बताया
इस कार्यक्रम का उद्देश्य और योजना अंतर्गत चलाए जाने वाले गतिविधियों पर योजना पर चिंतन मंथन करना है। साथ ही जिला बार उपयुक्त तकनीकों को सूचीबद्ध किया गया है। विभिन्न जिलों की कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने अपनी अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत किया। इसमें विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ ने अपना सुझाव दिया।बिहार और झारखंड के तीस जिलों में 5 सालों तक जलवायु अनुकूल कृषि के लिए रूपरेखा तैयार, दरभंगा और जाले के जोगियारा गांव का चयन, चमकेंगे किसानों के किस्मत, पढ़िए पूरी खबर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परियोजना निदेशक जीएनवीएस प्रसाद सीआरआईडी क्रेडा हैदराबाद ने विस्तार से इस योजना का उद्देश्य और योजना का उद्देश्य उपेक्षा एवं दिशा को विस्तृत रूप से समझाया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय भागलपुर के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आर के सुहाने ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुचारा के प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया किसानों को कार्य योजना बनाने में सहभागिता सुनिश्चित हो।
कार्यक्रम में डॉ रमेश कुंडू निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा समस्तीपुर ने सुखार एवं सुखार की स्थिति में पशुधन प्रबंधन तकनीकी पर विशेष जानकारी दी।
डॉ. केजी. मंडल निदेशक एमजीआईएफ, आईआरआई मोतिहारी ने समन्वित कृषि की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन अटारी पटना के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अमरेंद्र कुमार ने किया।
कार्यक्रम की जानकारी देते कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. दिव्यांशु शेखर ने बताया कि भारत सरकार के इस परियोजना से दरभंगा के किसानों का अधिक लाभ मिलेगा, उन्होंने बताया कि सरकार के दिशा निर्देश के अनुसार जाले प्रखंड के जोगियारा गांव का चयन पहले चरण में किया गया है।
बिहार और झारखंड के तीस जिलों में 5 सालों तक जलवायु अनुकूल कृषि के लिए रूपरेखा तैयार, दरभंगा और जाले के जोगियारा गांव का चयन, चमकेंगे किसानों के किस्मत, पढ़िए पूरी खबर
जल्द ही इस योजना का लाभ गांव की किसानों को सीधे मिलने लगेगा। कार्यक्रम में सभी 14 केबिके के प्रधान समेत क्रीड़ा के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पीके पांडे पांडेय, मखाना विशेषज्ञ अनिल कुमार, उप निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. पुष्पा कुमारी, डॉ.अनुपमा कुमारी, प्रस्तुतिकरण और संचालन डॉ.आरपी प्रसाद ने किया।
इन जिलों का चयन हुआ जलवायु अनुकूल खेती परियोजना के लिए
सुपौल, बक्सर, गुमला, गोड्डा, दरभंगा, पश्चिमीचंपारण, सीवान, भागलपुर, नालंदा, लखीसराय, सहरसा, किशनगंज, सीतामढ़ी, गढ़वा, बिहार एवं झारखंड के 14 जिलों में पांच वर्षों तक चलेगा यह जलवायु अनुकूल खेती कार्यक्रम।
इस कार्यक्रम के तहत चयनित किसानों के खेती में लगने वाले सभी तरह का खर्च संबंधित कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से दिया जाएगा।
You must be logged in to post a comment.