

जाले। कृषि विज्ञान केंद्र में विश्व दलहन दिवस के अवसर पर कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मभूषण हुकुमदेव नारायण यादव (Padma Bhushan Hukumdev Narayan Yadav) ने उपस्थित कृषक समूह को संबोधित करते हुए बताया कि बिना स्वस्थ भारत बनाए हम सबल भारत की परिकल्पना नहीं कर सकते हैं।
दलहन गरीबों का प्रोटीन का मुख्य स्रोत है, पूर्व से ही महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए दलहन का विशेष महत्व रहा है। क्योंकि महिलाओं में प्रोटीन की आवश्यकता अधिक होती है। स्वस्थ महिला ही स्वस्थ शिशु को जन्म देती है,आज जब कि हम धान और गेहूं का उत्पादन आवश्यकता से अधिक करते हैं।

वहीं, दलहन हमें विदेशों से मंगाना पड़ता है। ऐसे में किसानों को दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती को बढ़ाना चाहिए इसके लिए कृषि से जुड़े हुए विभिन्न विभागों को अधिक से अधिक गुणवत्ता युक्त दलहन एवं तिलहन के बीज किसानों को उपलब्ध कराना चाहिए।
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उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से भी दलहन और तिलहन पर अधिक से अधिक कार्यक्रम आयोजित कर किसानों को प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया।
किसानों को संबोधित करते हुए आत्मा के परियोजना निदेशक पूर्णेन्दु नाथ झा ने किसानों को बताया कि उन्नत तकनीकों के सहायता से दलहन की भी उत्पादकता काफी बड़ी है। लेकिन, अभी इसको काफी आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बीजों के चयन से लेकर उस की बुवाई फसल प्रबंधन एवं कटाई में किसान सावधानी बरतकर अच्छा उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
हमें अपनी पुरानी सोच को बदल कर उपजाऊ भूमि में भी दलहन और तिलहन की खेती करने की जरूरत है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने बताया कि केंद्र सरकार की सीएफएलडी योजना के अंतर्गत जाले, सिंहवाड़ा, हनुमाननगर प्रखंड के 10 से अधिक गांव में उन्नत दलहन एवं तिलहन फसल उत्पादन की तकनीकों का प्रत्यक्षण 100 से अधिक किसानों के खेतों में किया गया है।
वहीं, राज्य सरकार संपोषित जलवायु अनुकूल खेती परियोजना के अंतर्गत 125 एकड़ से अधिक में जाले, राढी, रतनपुर, ब्रह्मपुर एवं सनहपुर गांव में दलहन एवं तिलहन का प्रत्यक्षण किया गया है।

उन्होंने किसानों से दलहन फसल को लगाते समय उनके बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित कर प्रयोग करने का सुझाव दिया। इससे फसल वातावरण से नाइट्रोजन ले दलहनी फसलों की उत्पादकता को बढ़ाता मिले। साथ ही अपने फसल चक्र में दलहन का समावेश करने पर अन्य फसलों के उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि दलहन फसलों की खेती करने से भूमि में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ती है।
वहीं, कार्यक्रम का संचालन कृषि विज्ञान केंद्र के पौधा संरक्षण वैज्ञानिक डॉक्टर आर पी प्रसाद ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम में सैकड़ों कृषक एवं कृषक महिलाओं ने भाग लिया।
प्रगतिशील कृषक भोला प्रसाद सिंह ने भी वैज्ञानिकों से दलहन की खेती में आ रही चुनौतियों की जानकारी दी गोविंद कुमार जी ने नीलगाय एवं अन्य पशुओं से हो रहे दलहनी फसलों के नुकसान की जानकारी दें कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के सभी कर्मी और वैज्ञानिक मौजूद थे।
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