केवटी इलेक्ट्रिसिटी न्यूज़: दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड में बिजली संकट गहरा गया है, जिससे 50 हजार से अधिक उपभोक्ता भीषण गर्मी में परेशान हैं। प्रखंड क्षेत्र में बिजली आपूर्ति व्यवस्था दिनों-दिन बदतर होती जा रही है। लगातार हो रही बिजली कटौती ने हजारों उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। स्थिति यह है कि दिनभर बिजली की आंख-मिचौनी जारी रहती है और उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलना मुश्किल हो गया है।
जनजीवन पर गहरा असर और जल-नल योजना बाधित
यह स्थिति केवल घरेलू कार्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, व्यापार, कृषि तथा सरकारी योजनाओं पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली आने के बाद भी एक-दो घंटे लगातार आपूर्ति बनी रहना मुश्किल है; हर पाँच से दस मिनट पर बिजली के आने-जाने का सिलसिला बना रहता है। इससे छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है, वहीं दुकानदारों और छोटे व्यवसायियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। बिजली से चलने वाले उपकरण बार-बार ट्रिप होने और खराब होने की आशंका से उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।
बिजली आपूर्ति में लगातार व्यवधान का असर प्रखंड क्षेत्र की जल-नल योजना पर भी देखा जा रहा है। पर्याप्त बिजली नहीं मिलने के कारण कई स्थानों पर जलापूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे लोगों के सामने पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न होती जा रही है। गर्मी के मौसम में पानी की बढ़ती जरूरत के बीच यह समस्या लोगों की चिंता और बढ़ा रही है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
जर्जर 33 केवी लाइन बनी बड़ी समस्या
जानकारी के अनुसार, पिछले लगभग पाँच वर्षों से बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के नाम पर समय-समय पर मेंटेनेंस कार्य किए गए हैं। इस दौरान जर्जर तारों की मरम्मत, बिजली पोल बदलने और वायरिंग सुधारने जैसे कार्यों पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद आपूर्ति व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।
रैयाम पावर सबस्टेशन से रैयाम, केवटी, चकभवानी और गोखुल सहित चार फीडरों के माध्यम से लगभग 25 हजार उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति की जाती है। वहीं, पंडौल ग्रिड से रैयाम पावर सबस्टेशन तक आने वाली 33 केवी लाइन काफी जर्जर हो चुकी है। इसी लाइन के माध्यम से रैयाम के साथ-साथ जलवारा सबस्टेशन को भी बिजली आपूर्ति की जाती है। दोनों सबस्टेशनों को मिलाकर लगभग 50 हजार से अधिक उपभोक्ता इस 33 केवी लाइन पर निर्भर हैं। ऐसे में लाइन में किसी भी प्रकार की खराबी का सीधा असर हजारों परिवारों और संस्थानों पर पड़ता है।
देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंडौल से रैयाम के बीच लगी 33 केवी लाइन के तार बहुत पुराने और जर्जर हो चुके हैं। आंधी-बारिश तो दूर, हल्की हवा चलने पर भी कई जगह तार टूट जाते हैं। कई बार अधिक भार पड़ने के कारण तार गर्म होकर पिघल जाते हैं और जल जाते हैं, जिससे बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो जाती है। तार टूटने या जलने की स्थिति में मरम्मत कार्य पूरा करने में चार से पाँच घंटे या उससे अधिक समय लग जाता है। इसके अलावा, लाइन की क्षमता कम होने के कारण लोड बढ़ने पर लोड शेडिंग की समस्या भी लगातार बनी रहती है, जिससे उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली से वंचित रहना पड़ता है। यह स्थिति दरभंगा इलेक्ट्रिसिटी न्यूज़ में भी अक्सर चर्चा का विषय बनती है।
विभागीय अधिकारियों के दावे और समाधान की मांग
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों द्वारा पंडौल से रैयाम के बीच जर्जर 33 केवी लाइन को बदलने की मांग कई बार बिजली विभाग के समक्ष उठाई गई है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। लोगों ने विभाग से अविलंब नई लाइन लगाने, पुराने तार बदलने तथा आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की मांग की है।
इस संबंध में पूछे जाने पर विद्युत विभाग के कनीय अभियंता कमलेश कुमार ने बताया कि लो-वोल्टेज और बार-बार बिजली बाधित होने की समस्या को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2011 में रैयाम फीडर को एक से बढ़ाकर चार फीडर किया गया था। उन्होंने कहा कि समय-समय पर उपलब्ध कराई गई मेंटेनेंस राशि से आवश्यक कार्य भी किए गए हैं। विभाग को राशि उपलब्ध होते ही अतिरिक्त सुधार कार्य शुरू किए जाएँगे।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि पंडौल से रैयाम तक की जर्जर 33 केवी लाइन को प्राथमिकता के आधार पर बदला जाए। उन्होंने बिजली ढांचे का आधुनिकीकरण करने तथा निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी और स्थायी कदम उठाने की अपील की है, ताकि भीषण गर्मी के इस मौसम में लोगों को बड़ी राहत मिल सके।







