
LPG Cylinder: चूल्हे की आग से ज्यादा दिलों में बेचैनी की आग भड़क रही है। जाले में एलपीजी सिलेंडर के लिए मची अफरातफरी कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही है, जहां ट्रक आते ही लोग ऐसे टूट पड़ते हैं मानो कोई खजाना बंट रहा हो। आलम यह है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ रहा है।
क्यों मची है LPG Cylinder के लिए मारामारी?
जाले प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों घरेलू गैस सिलेंडर को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। स्थिति इतनी विकट है कि जैसे ही सिलेंडरों से भरा कोई ट्रक किसी एजेंसी पर पहुंचता है, उपभोक्ताओं की भारी भीड़ उस पर टूट पड़ती है। ऐसा लगता है कि लोग पहले से ही ट्रक का इंतजार कर रहे हों। इस अफरातफरी के पीछे की कहानी काफी जटिल है। नाम न छापने की शर्त पर एक उपभोक्ता ने बताया कि प्रखंड के अधिकांश लोग रोजी-रोटी के लिए बाहर के शहरों में रहते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन तो ले रखा है, लेकिन वे अपना कार्ड किसी होटल वाले या छोटे सिलेंडरों में रिफिलिंग करने वाले व्यापारियों को देकर सब्सिडी से कमाई करते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब जब ईद जैसे त्योहारों पर वे घर लौटते हैं, तो उन्हें सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। लेकिन तब तक उनके कार्ड पर कोई और गैस उठा चुका होता है।
इस पूरे मामले में सरकार का एक नियम भी आग में घी का काम कर रहा है। नियम के मुताबिक, शहरी क्षेत्र में 25 से 30 दिन और ग्रामीण क्षेत्र में 45 दिन से पहले दूसरा सिलेंडर नहीं मिल सकता। ऐसे में जब प्रवासी मजदूर घर आते हैं और उन्हें सिलेंडर नहीं मिलता, तो वे एजेंसियों पर हंगामा करते हैं। इसी वजह से गैस एजेंसियों पर हमेशा तनाव का माहौल बना रहता है।
18 मार्च का वो दिन, जब बेकाबू हो गई भीड़
यह समस्या 18 मार्च को अपने चरम पर पहुंच गई जब ब्रह्मपुर पूर्वी स्थित कटाई एजेंसी और राढ़ी के ओम एचपी गैस एजेंसी पर बिल्कुल फिल्मी नजारा देखने को मिला। ओम एचपी गैस एजेंसी पर जैसे ही करीब 500 सिलेंडरों से भरा ट्रक पहुंचा, सैकड़ों की संख्या में उपभोक्ता गोदाम पर जमा हो गए। भीड़ इतनी उग्र हो गई कि एजेंसी के कर्मचारी सिलेंडरों को वितरण वाहन पर लोड तक नहीं कर पाए। लोग सीधे ट्रक पर चढ़कर ही सिलेंडर उठाने लगे। मौके पर तैनात चौकीदार के लिए भी भीड़ को नियंत्रित करना असंभव हो गया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एजेंसी प्रबंधक ने तुरंत स्थानीय थाने और वितरण के लिए नियुक्त मजिस्ट्रेट पीओ रजनीश कुमार को सूचना दी। सूचना मिलते ही मनरेगा के तकनीकी सहायक राजेश कुमार और एसआई भरत कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और हालात को काबू में किया। प्रबंधक ने बताया कि कई उपभोक्ता बिना डीएसी नंबर बताए ही सिलेंडर लेने पर अड़े थे। उस दिन भारी हंगामे के बीच वितरण के बाद भी लगभग 50 उपभोक्ताओं को डीएसी नंबर होने के बावजूद खाली हाथ लौटना पड़ा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
एजेंसी प्रबंधकों ने बताई अपनी विवशता
वहीं, कटाई एजेंसी पर भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी। प्रबंधक आदित्य कुमार ने बताया कि उनके यहां साढ़े तीन सौ सिलेंडर से भरा ट्रक पहुंचा था। शुरुआत में यहां भी अफरातफरी हुई, लेकिन जल्द ही स्थिति को सामान्य कर लिया गया। करीब 200 सिलेंडरों का वितरण डीएसी नंबर देने के बाद सीधे ट्रक से ही किया गया। उन्होंने बताया कि कुछ उपभोक्ताओं को होम डिलीवरी की सुविधा भी दी गई। नगर परिषद स्थित देवी मां गैस एजेंसी के प्रबंधक का कहना है कि एजेंसी पर उन्हीं उपभोक्ताओं की भीड़ रहती है जिनका ऑनलाइन बुकिंग नहीं होता है। उनका कहना है कि होम डिलीवरी की व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है। इस पूरे प्रकरण में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों की एक बड़ी संख्या है जो नियमों के फेर में फंसकर एजेंसियों पर हंगामा करने को मजबूर हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अधिकारी भी लगातार एजेंसियों का चक्कर लगाकर स्थिति को सामान्य करने में जुटे हैं।






