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मार्च, 24, 2026
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Darbhanga News: मिला महामंत्र…Makhana Farming से होगी बंपर कमाई! अब कीट और काई नहीं करेंगे फसल बर्बाद, वैज्ञानिकों ने बताया ये अचूक तरीका

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Makhana Farming: मिथिला की धरती का काला हीरा कहा जाने वाला मखाना किसानों के लिए किसी सोने की खान से कम नहीं, लेकिन सही जानकारी के अभाव में कीट और रोग इस खान पर डाका डाल देते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए दरभंगा में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सफलता का मूलमंत्र दिया है।

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Makhana Farming में इन दो समस्याओं का रखें खास ध्यान

जाले स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) परिसर में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण जागरूकता सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मैनकाइंड एग्रीकल्चर कंपनी के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरीय वैज्ञानिक सह अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर ने की। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘मखाना रोग प्रबंधन’ था, जिसका उद्देश्य किसानों को मखाना की फसल में लगने वाले प्रमुख रोगों और कीटों से निपटने के वैज्ञानिक तरीके सिखाना था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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डॉ. दिव्यांशु शेखर ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि मार्च-अप्रैल के महीने में मखाना के तालाबों में काई की समस्या आम है, जो फसल की शुरुआती बढ़त को बुरी तरह प्रभावित करती है। उन्होंने इसके नियंत्रण के लिए कॉपर सल्फेट के सही उपयोग की सलाह दी। इसके अतिरिक्त, एफिड कीट के प्रकोप पर उन्होंने कहा कि समय रहते इमिडाक्लोप्रिड की एक मिलीलीटर दवा को तीन लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से फसल को बचाया जा सकता है। यह एक सफल फसल प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव और दी तकनीकी जानकारी

कार्यक्रम को और अधिक व्यावहारिक बनाने के लिए केवीके सीतामढ़ी से आए उद्यान वैज्ञानिक डॉ. मनोहर पंजीकार ने किसानों को मखाना उत्पादन की उन्नत तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बीज के सही चयन, रोपण की वैज्ञानिक विधि, जल प्रबंधन की बारीकियों और कीट-रोग नियंत्रण के एकीकृत तरीकों पर प्रकाश डाला, जिससे किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- https://deshajtimes.com/news/national/

इस अवसर पर मैनकाइंड एग्रीकल्चर कंपनी के प्रतिनिधि के.पी.के. राय और मणिकांत ने भी किसानों के साथ अपने जमीनी अनुभव साझा किए। उन्होंने फसल की विभिन्न अवस्थाओं में लगने वाले कीट-रोगों की पहचान और उनके प्रभावी नियंत्रण के बारे में बताया। कार्यक्रम में केवीके के अन्य वैज्ञानिकों जैसे इंजी. निधि कुमारी, डॉ. पूजा कुमारी, डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा और डॉ. चंदन कुमार ने भी किसानों को महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां दीं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दरभंगा जिले के विभिन्न प्रखंडों से 200 से अधिक किसान और महिला किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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