
कम बारिश, धान की खेती, महिला श्रमिकों की भूमिका और किसानों की चुनौतियां। यही है दरभंगा जिला का जाले। जाले में मानसून धोखा दे गया! किसान नलकूप और महिला मजदूरों के भरोसे कर रहे धान की रोपनी। पानी नहीं, मेहनत से उम्मीद!@जाले-दरभंगा, देशज टाइम्स।
जाले में राजेंद्र मंसूरी धान की बुआई शुरू, लेकिन चिंता गहराई
जाले में महिला मजदूरों के दम पर हो रही धान की रोपनी। बारिश नदारद, खेत सूखे! जाले में किसान कर रहे नलकूप से पटवन – देखिए खेतों का हाल। धान की रोपनी में महिलाएं बनीं संकटमोचक! जाले में पुरुष मजदूर चले गए पंजाब। जाले में राजेंद्र मंसूरी धान की बुआई शुरू, लेकिन बारिश न मिलने से चिंता गहराई। धान की रोपनी पर मंडराया संकट! जाले में किसान बोल रहे – इस बार पैदावार खतरे में। 150 रुपये प्रति कट्ठा, महिला मजदूरों के भरोसे धान रोपनी! जाले में बारिश ने बढ़ाई बेचैनी@जाले-दरभंगा, देशज टाइम्स।
जाले में मानसून का असर फीका, किसानों को पटवन कर धान रोपाई करने की मजबूरी
जाले/दरभंगा, देशज टाइम्स। मौसम विभाग के लगातार अलर्ट के बावजूद जाले क्षेत्र में मानसून की बारिश काफी कम हो रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
मुख्य बिंदु: महिला मजदूर ही भरोसा,पुरुष मजदूर पंजाब में राजेंद्र मंसूरी की रोपनी प्रारंभ, स्वेता के लिए खेत तैयारी
कम बारिश से धान की रोपनी प्रभावित, पटवन से चल रहा काम। राजेंद्र मंसूरी की रोपनी प्रारंभ, स्वेता के लिए खेत तैयारी। खरपतवार की समस्या, नर्सरी की देखभाल में बढ़ा खर्च। महिला मजदूरों पर निर्भर धान की खेती, पुरुष मजदूर पंजाब में।
आर्द्रा नक्षत्र की शुरुआत के साथ आमतौर पर लंबी अवधि
आर्द्रा नक्षत्र की शुरुआत के साथ आमतौर पर लंबी अवधि वाले धान (Paddy Varieties) की रोपनी का समय होता है, लेकिन बारिश की कमी के कारण किसान अब नलकूपों से पटवन कर धान की रोपाई कर रहे हैं।
पटवन के सहारे शुरू हुई राजेन्द्र मंसूरी धान की रोपनी
इलाके में सर्वाधिक उत्पादक धान का प्रभेद ‘राजेन्द्र मंसूरी’ माना जाता है। कई गांवों के किसान इस प्रभेद की रोपाई नलकूप से सिंचाई कर शुरू कर चुके हैं। वहीं ‘राजेन्द्र स्वेता’ धान लगाने वाले किसान खेतों की तैयारी में जुटे हैं और जुलाई के पहले सप्ताह से रोपनी की उम्मीद है।
कम बारिश से नर्सरी में खरपतवार की समस्या
बारिश की अनियमितता के कारण धान की नर्सरियों में खरपतवार उगने लगे हैं, जिससे रोपाई की गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका है। किसान खरपतवार हटाने और पौध की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त मेहनत और खर्च कर रहे हैं।
प्रवासी मजदूरों की कमी, महिलाएं संभाल रहीं धान रोपनी का जिम्मा
जोगियारा के प्रगतिशील किसान भोला प्रसाद सिंह ने बताया कि इलाके के अधिकतर पुरुष मजदूर पंजाब चले गए हैं। धान की रोपाई का पूरा कार्यभार अब महिला मजदूरों के कंधों पर है। महिलाएं भी अब एक कट्ठा धान रोपनी का ₹150 मेहनताना ले रही हैं, जो पहले पुरुषों को दिया जाता था।