
बिरौल देशज टाइम्स डिजिटल डेस्क। बिरौल कबीर आश्रम के बरामदे पर जन्मे नवजात ने खोल दी Biraul CHC की पोल। सवाल यही है, इस व्यवस्था के कितने गुनहगार हैं? क्या ऐसे कर्मियों पर सीएचसी स्वास्थ्य प्रशासन कोई कार्रवाई करेगा? खबर तो खबर है, मगर…जो तस्वीर हम दिखा रहे हैं, व्यवस्था की बदसूरत पहलू की पहली पंगत यही है। पढ़िए उत्तम सेन गुप्ता की यह रिपोर्ट
प्रसव के लिए बिरौल सीएचसी आई महिला ने सुपौल बाजार के रास्ते में कबीर आश्रम के बरामदे पर ही बच्चे को जन्म दिया। इस दौरान सहयोग कर रहे दर्जनों महिलाओं ने सीएचसी के व्यवस्था पर अंगुली उठाते हुए कहा कि सीएचसी में नर्स, आशा, दाय सभी मरीजों के परिजनों से लूटने के लिए पदस्थापित हैं।
सीएचसी से पैदल चलकर घर जा रही गर्भवती महिला की प्रसव रास्ते में हो जाने की सूचना मिलते ही स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों में हड़कंप मच गया। सभी उक्त स्थान पर पहुंच कर जच्चा-बच्चा को एम्बुलेंस से सीएचसी ले आए। जहां दोनों का प्राथमिक उपचार के बाद डिसचार्ज कर दिया गया। चिकित्सक ने मां और बच्चा दोनों को सुरक्षित बताया है।
कि पोखराम गांव से विनोद मंडल की पत्नी को प्रसव के लिए उसके परिजन पांच दिन पूर्व सीएचसी लाए थे। शारीरिक स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण उक्त महिला को डीएमसीएच रेफर किया गया था। लेकिन उसके परिजन डीएमसीएच जाने से इंकार करते हुए कहां चले गए पता नहीं।
इस घटना के पांच दिन बाद विनोद अपनी पत्नी को लेकर शुक्रवार को पुनः सीएचसी आए। जहां, उसकी स्थिति को देख चिकित्सक एवं एएनएम ने उसे डीएमसीएच रेफर कर दिया। लेकिन रेफर कर कागज लिए बगैर ही विनोद और उसकी पत्नी सीएचसी से कब चली गई इसकी भनक तक नहीं चली। किसी माध्यम से पता चला कि उक्त महिला ने रास्ते में बच्चे को जन्म दिया है। एम्बुलेंस भेज कर उसे सीएचसी लाया गया, उपचार के बाद उसे छुट्टी दे दी गई है।
कि रेफर कर दिए जाने के बाद आशा एवं अस्पताल के एएनएम भी उसका साथ छोड़ दिया। जो मानवता के विपरीत किया गया कार्य है। सीएचसी के अधीन कई आशा कार्यकर्ता हैं, जिसका संबंध निजी अस्पताल से हैं, तथा सीएचसी आए गर्भवती माताओं को एएनएम के मिलीभगत से डीएमसीएच रेफर के नाम पर निजी अस्पताल ले जाते हैं।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ.फूल कुमार मिश्र ने बताया कि इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। संज्ञान में आने पर संबंधित आशा एवं एएनएम के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

