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दर्द से जंग जीतकर लौटे 50 योद्धा, दरभंगा के पारस ग्लोबल हॉस्पिटल का ट्रॉमा, मौत और ज़िंदगी का ‘गोल्डन आवर’

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दरभंगा, देशज टाइम्स: सड़क पर हुआ एक हादसा… सिर में लगी चोट या रीढ़ की हड्डी का गहरा जख्म… एक पल में ज़िंदगी पलट सकती है। लेकिन क्या हो अगर समय रहते सही कदम उठा लिए जाएं? हाल ही में दरभंगा में आयोजित एक कार्यक्रम ने यही दिखाया कि कैसे समय पर मिला उपचार 50 जिंदगियों को वापस पटरी पर ले आया, और बताया ट्रॉमा के उस ‘गोल्डन आवर’ की अहमियत, जो मौत और ज़िंदगी के बीच का फासला तय करता है।

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हाल ही में पारस ग्लोबल हॉस्पिटल, दरभंगा के न्यूरोसाइंस विभाग ने एक महत्वपूर्ण ट्रॉमा जागरूकता अभियान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनता को सड़क दुर्घटनाओं, सिर की गंभीर चोटों, रीढ़ की हड्डी से संबंधित जख्मों, छाती की चोटों और लकवा जैसी आपातकालीन स्थितियों में समय पर की गई कार्रवाई के महत्व से अवगत कराना था। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाया गया, जिससे उन्हें अपनी सेहत का आकलन करने का अवसर मिला।

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दर्द से उबरकर लौटे ‘योद्धाओं’ ने साझा किए अनुभव

अभियान का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह था कि इसमें ट्रॉमा की गंभीर चोटों से सफलतापूर्वक उबर चुके 50 मरीजों ने हिस्सा लिया। इन ‘योद्धाओं’ ने मंच पर आकर अपने संघर्ष और समय पर मिले उपचार की बदौलत सामान्य जीवन में लौटने की अपनी प्रेरक कहानियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार सही समय पर मिली चिकित्सा सहायता ने उन्हें दूसरी जिंदगी दी और वे अब दोबारा सामान्य रूप से अपना जीवन जी पा रहे हैं। इस अवसर पर कंसल्टेंट न्यूरोसर्जरी डॉ. संजीव कुमार और कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी डॉ. यासीन ने भी अपने विचार रखे और ट्रॉमा प्रबंधन में जागरूकता की भूमिका पर प्रकाश डाला।

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गोल्डन आवर: जिंदगी बचाने का सबसे अहम समय

पारस ग्लोबल हॉस्पिटल, दरभंगा के फैसिलिटी डायरेक्टर मनोज कुमार ने इन सभी साहसी मरीजों को सम्मानित किया और अस्पताल की ट्रॉमा सेवाओं की सराहना की। इस मौके पर पारस एचएमआरआई हॉस्पिटल, पटना के जोनल डायरेक्टर अनिल कुमार ने ‘गोल्डन आवर’ के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि किसी भी दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा, जिसे ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है, उपचार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस अवधि में यदि मरीज को सही अस्पताल तक पहुंचा दिया जाए और उचित उपचार मिल जाए, तो गंभीर से गंभीर स्थिति में भी उसकी जान बचाई जा सकती है।

अनिल कुमार ने विशेष रूप से यह भी सलाह दी कि किसी भी प्रकार की ट्रॉमा की स्थिति में मरीज के परिजनों को घबराहट से बचना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें तुरंत बिना समय गंवाए मरीज को नजदीकी या विशेषज्ञ अस्पताल पहुंचाना चाहिए, ताकि प्रशिक्षित डॉक्टरों की टीम तत्काल सर्वोत्तम उपचार शुरू कर सके और अनमोल जीवन को बचाया जा सके। कार्यक्रम में डॉ. ज्ञान रंजन, डॉ. बी. के. सिंह, डॉ. संजय कुमार सिंह और डॉ. केतन चंद्र नथानी सहित अन्य चिकित्सकों ने भी अपने विचार साझा किए।

पारस ग्लोबल अस्पताल: आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस

पारस ग्लोबल हॉस्पिटल, दरभंगा, 100 बिस्तरों वाला एक आधुनिक चिकित्सा संस्थान है, जो एक ही स्थान पर सभी प्रमुख चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करता है। अस्पताल में एक अत्याधुनिक आपातकालीन सुविधा मौजूद है, जहां उच्च योग्य और अनुभवी डॉक्टरों की टीम हर समय उपलब्ध रहती है। यह अस्पताल बिहार में व्यापक ट्रॉमा और कैंसर देखभाल सहित विभिन्न विशिष्टताओं के लिए अपनी विशेषज्ञता, मजबूत बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए जाना जाता है।

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