

संजय कुमार राय, देशज टाइम्स दरभंगा। पीएफआई को बदनाम करने की साजिश देश स्तर पर रची जा रही हैं इसका बानगी भर हैं पटना पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई जो मनग्रंथ और काल्पनिक हैं।
पटना पुलिस की कथित झूठी और मनगढ़ंत कहानी के बाबत रविवार को पीएफआई के कार्यकर्ताओं ने उर्दू नीम चौक से नाका नं 5 तक रैली निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की ओर से जारी किए गए बयान तथा दो लोगों की गिरफ्तारी पर सवाल खड़े किए।
प्रदेश अध्यक्ष महबूब आलम ने अपने बयान में कहा कि 11 जुलाई को गिरफ्तार कर तीन दिनों तक गैर कानूनी तरीके से पटना पुलिस ने दो लोगों को हिरासत में रखा और 13 जुलाई की शाम को दोनों को आतंकवाद से जोड़ दिया जो सरासर गलत हैं। गिरफ्तार अतहर परवेज एवं जलालुद्दीन पॉपुलर फ्रंट के सदस्य नहीं हैं।
अतहर परवेज एक समाजसेवी तथा एसडीपीआई के पटना जिला महासचिव है जबकि जलालुद्दीन न तो एसडीपीआई से है और न ही पीएफआई से। पुलिस द्वारा जिस मकान का उल्लेख प्रेस बयान में किया गया है उस मकान का मालिक जलालुद्दीन है जिसे अतहर परवेज ने निजी तौर पर किराए पर लिया है। पटना पुलिस द्वारा पॉपुलर फ्रंट पर हथियार चलाने की ट्रैनिंग का आरोप लगाना तथा झूठे मुकदमे दर्ज कर कार्रवाई करना किसी राजनीतिक षड्यंत्र की ओर इशारा करता है।
ज्ञात हो कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया बिहार प्रदेश की ओर से आने वाले 24 जुलाई को “सेव द रिपब्लिक”-“गणतंत्र बचाओ” के विषय पर श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। उपरोक्त कार्यक्रम को प्रभावित करने के उद्देश्य से पटना पुलिस द्वारा कार्रवाई कर सनसनी फैलाने की कोशिश की गई है।
पटना पुलिस की ओर से जारी प्रेस नोट में 2047 तक मुस्लिम राष्ट्र बनाने वाली कहानी पूर्णतः हास्यास्पद एवं भ्रामक है तथा पुलिस की ओर से जारी किए गए दस्तावेज पूर्णतः मनगढ़ंत व काल्पनिक है।
महबूब ने कहा कि अक्सर देखा गया हैं कि किसी भी मामले में एक समुदाय को टारगेट किया जाता हैं इसकी इजाजत भारत के लोकतांत्रिक व्यवस्था में नहीं हैं !उन्होंने कहा कि पीएफआई किसी आतंकी या अपराधियों को संरक्षण नहीं देता।




