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29 अगस्त, 2024
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“60 साल सेवा, EPF की मांग… 10 हज़ार से कम मानदेय नहीं करेंगे ‘ बर्दाश्त ‘, Darbhanga में ठप हो सकती है सफाई व्यवस्था, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

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जाले, दरभंगा | प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों के स्वच्छता कर्मी और स्वच्छता पर्यवेक्षक अपनी आठ सूत्री मांगों को लेकर शुक्रवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल की वजह से ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता सेवाएं प्रभावित होनी शुरू हो गई हैं।

कर्मियों ने बीडीओ मनोज कुमार को सौंपा ज्ञापन

हड़ताल पर गए कर्मियों के शिष्ट मंडल ने अपनी मांगों को लेकर प्रभारी बीडीओ मनोज कुमार को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में कर्मियों ने कहा कि उनकी लंबे समय से लंबित मांगों को अब तक सरकार द्वारा पूरा नहीं किया गया है।

ज्ञापन में विशेष रूप से कहा गया कि:

  • स्वच्छता पर्यवेक्षक को अंशकालिक (Part-time) से हटाकर पूर्णकालिक (Full-time) किया जाए।

  • ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 8 नवंबर को जारी पत्र (जखरी पत्र) के संदर्भ में संविदा प्रणाली को लागू किया जाए।

प्रमुख मांगें: आठ सूत्री एजेंडा

स्वच्छता कर्मियों और पर्यवेक्षकों ने अपनी आठ सूत्री मांगों को स्पष्ट किया। इनमें मुख्य बिंदु शामिल हैं:

  1. पंचायती राज विभाग द्वारा 15 जनवरी 2021 को निर्गत पत्र के अनुसार 20,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय लागू किया जाए।

  2. सेवाकाल को बिना शर्त 60 वर्ष तक बढ़ाया जाए।

  3. सभी बकाया मानदेय का तत्काल भुगतान किया जाए।

  4. स्वच्छता कर्मियों का मानदेय कम से कम 10,000 रुपये मासिक किया जाए।

  5. कार्य अवधि में कर्मी की मृत्यु होने पर आकस्मिक मृत्यु लाभ (Ex-Gratia) दिया जाए और परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिया जाए।

  6. सभी कर्मियों के लिए ईपीएफ (Employees’ Provident Fund) लागू किया जाए।

  7. कार्य अवधि समाप्त होने के बाद यदि अतिरिक्त कार्य कराया जाए तो अतिरिक्त भत्ता (Extra Allowance) दिया जाए।

  8. स्वच्छता पर्यवेक्षकों को संविदा के बजाय स्थायी नियुक्ति का दर्जा दिया जाए।

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स्थानीय प्रशासन की भूमिका

ज्ञापन सौंपे जाने के बाद प्रभारी बीडीओ मनोज कुमार ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को उच्च अधिकारियों तक भेजा जाएगा। हालांकि, अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया है, जिसके कारण कर्मियों में नाराजगी है।

हड़ताल से प्रभावित हो रही स्वच्छता व्यवस्था

हड़ताल के चलते गांव-गांव में कचरा उठाव और सफाई कार्य रुक गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि हड़ताल लंबी खिंचती है, तो गांव में गंदगी और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

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स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) जैसे महत्वाकांक्षी अभियान पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है। केंद्र सरकार का यह मिशन, जिसका उद्देश्य भारत को ओपन डिफेक्शन फ्री (ODF) और स्वच्छ बनाना है, स्थानीय स्तर पर इन कर्मियों के योगदान पर ही निर्भर है।

स्वच्छता कर्मियों की सामाजिक भूमिका

स्वच्छता कर्मियों का कार्य केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि वे गांवों में जनस्वास्थ्य की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इनके प्रयासों से ही ग्रामीण क्षेत्र में बीमारियों की रोकथाम होती है और गांव का पर्यावरण स्वच्छ बना रहता है।

लेकिन मानदेय की समस्या, नौकरी की असुरक्षा और भत्तों की कमी के कारण ये कर्मी लगातार हड़ताल और आंदोलन का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं।

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सरकार से उम्मीदें

कर्मियों का कहना है कि वे तब तक हड़ताल जारी रखेंगे जब तक कि उनकी सभी आठ सूत्री मांगें पूरी नहीं होतीं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने शीघ्र पहल नहीं की तो यह आंदोलन जिले से बढ़कर पूरे बिहार में फैल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इनकी मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाए तो न केवल कर्मियों की समस्या दूर होगी, बल्कि स्वच्छ भारत मिशन को भी नई गति मिलेगी।

अब देखने वाली बात होगी कि…

दरभंगा जिले के जाले प्रखंड में स्वच्छता कर्मियों और पर्यवेक्षकों की हड़ताल ने एक बार फिर दिखा दिया कि स्वच्छता सेवाओं की रीढ़ इन्हीं कर्मियों पर टिकी हुई है। यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।

अब देखने वाली बात होगी कि बिहार सरकार और पंचायती राज विभाग इस गंभीर मुद्दे को कब तक और किस तरह हल करते हैं।

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