
Sanskrit Language: जैसे बूंद-बूंद से सागर बनता है, वैसे ही शब्द-शब्द से भाषा का संसार सजता है। लेकिन क्या हो जब सागर की गहराइयों में छिपा खजाना आम लोगों तक पहुंच ही न पाए? कुछ ऐसी ही कहानी देवभाषा संस्कृत की भी है, जिसे शास्त्रों और पोथियों से निकालकर जन-जन की जुबान पर लाने का एक बड़ा प्रयास दरभंगा में किया गया है।
Sanskrit Language: कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के भव्य दरबार हॉल में रविवार को ‘सरलमानकसंस्कृतम्’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य देवभाषा संस्कृत को सरल, व्यावहारिक और आम लोगों के लिए सुलभ बनाना था, ताकि इसके व्यापक प्रचार-प्रसार की दिशा में एक ठोस कदम उठाया जा सके। कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय और पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. विकाऊ झा ने दीप प्रज्वलित कर किया।
Sanskrit Language को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प
कार्यशाला में अपने अध्यक्षीय भाषण में कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डेय ने कहा कि सरल और मानक संस्कृत आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है। इससे यह भाषा केवल शास्त्रों तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आम जनता की भाषा बन सकेगी। उन्होंने इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को संस्कृत के पुनरुत्थान के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। कुलपति ने जोर देकर कहा कि संस्कृत को व्यवहार की भाषा के रूप में पढ़ाने और दैनिक शब्दावली को सरल तरीके से समझाने की आवश्यकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कहा कि कोई भी नई भाषा नियमित अभ्यास और व्यवहार से ही सीखी जा सकती है।
इसी क्रम में उन्होंने एक बड़ी अपील करते हुए कहा कि आगामी जनगणना में हमें यह संकल्प लेना होगा कि भारत की कम से कम दस प्रतिशत आबादी अपनी प्रथम या द्वितीय भाषा के रूप में संस्कृत को दर्ज कराए। उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि वे अपने महाविद्यालयों में पढ़ाने के अलावा आस-पास के क्षेत्रों में साप्ताहिक बैठकें करें और गीता पाठ, स्त्रोतपाठ तथा संस्कृत संभाषण का अभ्यास कराएं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
कार्यशाला में दिखा गजब का उत्साह
कार्यशाला के पहले सत्र में प्रसिद्ध व्याकरणाचार्य और अहिल्यास्थान के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. विकाऊ झा ने प्रशिक्षक के रूप में संस्कृत को मानक के साथ सरल बनाकर सिखाने के कई उपाय बताए। वहीं, दूसरे सत्र में स्नातकोत्तर व्याकरण विभाग के पूर्व आचार्य प्रो. सुरेश्वर झा ने अपने विद्वतापूर्ण व्याख्यान से सरल, शुद्ध और मानक संस्कृत के प्रयोग की पद्धति और शिक्षण की नई तकनीकों पर प्रकाश डाला। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस अवसर पर संस्कृत विश्वविद्यालय के कई प्राध्यापकों के साथ 31 अंगीभूत महाविद्यालयों से आए संयोजक और सह-संयोजक भी मौजूद थे, जो गोपालगंज, बक्सर, पूर्णिया, भागलपुर, बेगुसराय और छपरा जैसे जिलों से आए थे।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. यदुवीर स्वरूप शास्त्री एवं विश्वविद्यालय संयोजक डॉ. रामसेवक झा ने बताया कि इस कार्यशाला में संस्कृत भाषा को आधुनिक संदर्भ में सरल और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया। सभी प्रतिभागियों को कुलपति और मंचासीन अतिथियों के हाथों प्रमाणपत्र भी दिए गए। इस कार्यक्रम में डॉ. सुधीर कुमार, डॉ. वरुण कुमार झा, वीर सनातन पूर्णेन्दु राय, डॉ. ऋद्धिनाथ झा, डॉ. मुरारी मिश्र, डॉ. उमेश साफी, डॉ. ललन झा समेत कई विद्वान और शोध छात्र उपस्थित रहे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. संतोष कुमार तिवारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. वरुण कुमार झा ने प्रस्तुत किया।






