

इस मौके पर प्रशिक्षणार्थी को प्रमाण पत्र वितरण किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. दिव्यांशु शेखर के नेतृत्व में आयोजित गया गया। समापन समारोह को अपने संबोधन में डॉ. शेखर ने बताया कि इस कार्यक्रम का मूल्य उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर स्वरोजगार देकर स्वाबलंबी बनाना कर उन्हे आगे बढ़ावा देना है।
उन्होंने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्णता निशुल्क होता है,इसमें आए हुए प्रशिक्षणार्थियों को सैद्धांतिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है,ताकि वे इसे अपनाकर अपने अथवा अपने आस-पास के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बने और स्वरोजगार का सृजन करें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक डॉ. जयपाल (मत्स्य वैज्ञानिक) ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दरभंगा के जिले के कुल 30 अनुसूचित जाति के प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में आए प्रशिक्षणार्थियों को मुर्गी पालन से संबंधित मुर्गियों के रखरखाव, टीकाकरण, मुर्गियों में होने वाली सामान्य बीमारियों के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दूसरे दिन डॉ दिवाकर ब्राह्मणसील पशु चिकित्सा पदाधिकारी, कमतौल ने प्रशिक्षणार्थियों को मुर्गी पालन से संबंधित जानकारी साझा किया।
मुर्गियों के चूजा को शुरुआती दौर में रखरखाव, अवास प्रबंधन, आहार प्रबंधन, तथा विभिन्न मुर्गियों की नस्लें के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के अंतिम दिन डॉ. किनकर कुमार, पशु वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, सीतामढ़ी ने मुर्गियों में होने वाले विभिन्न प्रकार की विषाणु जनित रोग, जीवाणु जनित, फफूंद जनित आदि रोगों के बारे में जानकारी दीया, तथा उनका इलाज संबंधित विस्तृत जानकारी दी।
साथ ही सर्दियों एवं गर्मियों के दिनों में मुर्गियों का रखरखाव पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का समापन प्रमाण पत्र वितरण के साथ संपन्न किया गया। कार्यक्रम के समापन सत्र में केंद्र के विशेषज्ञ डॉ. गौतम कुणाल इं.अंजलि सुधाकर, डॉ. सिराजुद्दीन, पूजा कुमारी समेत अन्य सहकर्मी उपस्थित रहे।


