
तालाब संरक्षण: दरभंगा में ऐतिहासिक गंगासागर तालाब से एक बड़ा अभियान शुरू हो गया है। आज ‘तालाब बचाओ अभियान’ के तहत हजारों लोगों ने शांतिपूर्ण पदयात्रा निकाली, जिसका मकसद शहर के जीवनदायी तालाबों को बचाना है। इस दौरान बुडको की सौंदर्यीकरण परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
पदयात्रा का उद्देश्य और व्यापक भागीदारी
7 मई 2026 को शहर के ऐतिहासिक गंगासागर तालाब से ‘तालाब बचाओ अभियान’ की शांतिपूर्ण पदयात्रा शुरू हुई। पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मंजू झा, राम नारायण झा, उमेश राय रवि, धीरेंद्र कुमार झा, डॉ विद्या नाथ झा और नारायण मंडल ने हरी झंडी दिखाकर इसे रवाना किया।

इस पदयात्रा में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ छात्र और महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। पदयात्रियों ने गंगासागर, दिग्घी, हराही और दरभंगा शहर के अन्य तालाबों व वेटलैंड्स की सुरक्षा और संरक्षण के लिए झंडे, बैनर और तख्तियां लेकर नारे लगाए। यह यात्रा दोनार, अल्लपट्टी और बेंता होते हुए समाहरणालय स्थित धरनास्थल पर सभा में बदल गई।
इस सभा को छात्र नेता दिलीप कुमार, वामपंथी नेता धीरेंद्र कुमार झा, बैद्यनाथ यादव, आर. के. दत्ता, शारदा नंद चौधरी, स्वयंसेवी संस्था संघ के अध्यक्ष विजय कुमार पासवान, डॉ. अशोक कुमार सिंह, अर्चना जायसवाल, जय शंकर गुप्ता, इंदिरा कुमारी और किसान नेता योगेंद्र यादव सहित कई गणमान्य लोगों ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन अजीत कुमार मिश्र, डॉ. अमर जी कुमार, अभिषेक झा, विजय सक्सेना और तासीम नवाब ने किया। सैकड़ों छात्र-छात्राओं और महिलाओं की सहभागिता ने इस अभियान को और मजबूत किया।
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बुडको पर गंभीर आरोप और कानूनी उल्लंघनों का दावा
पदयात्रा के बाद, ‘तालाब बचाओ अभियान’ के संयोजक नारायण जी चौधरी के नेतृत्व में जिलाधिकारी, दरभंगा को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में बुडको की चल रही सौंदर्यीकरण परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अभियान 2013 से इन तीन ऐतिहासिक झीलों के पारदर्शी सीमांकन की मांग कर रहा है, जो 13 वर्षों से लंबित है। ज्ञापन में कहा गया है कि बुडको द्वारा किया जा रहा सौंदर्यीकरण वेटलैंड्स रूल्स, 2017 और इंडिकेटिव गाइडलाइन्स का खुला उल्लंघन है। यह जल और पर्यावरण से संबंधित कानूनों की भी पूरी तरह से उपेक्षा करता है।
अभियान का आरोप है कि यह बुडको परियोजना सर्वोच्च न्यायालय और पटना उच्च न्यायालय के आदेशों का भी उल्लंघन है। इतना ही नहीं, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के ओ.ए. 155/2022 दिनांक 23 मार्च 2023 को पारित आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा है। ज्ञापन में अधिकारियों और नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि क्या बिहार सरकार और बुडको के पदाधिकारियों के आदेश, सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और एनजीटी के आदेशों से अधिक महत्वपूर्ण हैं?
तालाब संरक्षण: तत्काल कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में दरभंगा के ऐतिहासिक तालाबों की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया है कि एक ओर बुडको कानूनों और दिशानिर्देशों का उल्लंघन कर इन ऐतिहासिक झीलों को “नष्ट” कर रहा है, वहीं दूसरी ओर दरभंगा के जिलाधिकारी, नगर आयुक्त, आयुक्त, विधायक और सांसद इस पर मौन हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि बुडको हमारे गंगासागर, दिग्घी और हराही तालाबों को “खत्म” कर रहा है, जिसे वह सौंदर्यीकरण का नाम दे रहा है।
तालाब संरक्षण के लिए अभियान ने जिला प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में अनुरोध किया गया है कि इसे राज्य के मुख्य सचिव, वेटलैंड्स अथॉरिटी और शहरी विकास सचिव को भेजा जाए, और बुडको के कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए।
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