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Railway SHO समेत 3 पर ‘ चार्जशीट ’, बिहार में सोना लूटकांड का बड़ा खुलासा, जानिए क्या था पूरा प्लान?

गया रेल थाना क्षेत्र के बहुचर्चित सोना लूटकांड में बड़ा एक्शन! पुलिस ने तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह, व्यवसायी मोहित अग्रवाल और परवेज आलम को आरोपी बनाते हुए न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया, जिससे रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया है।

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Gaya Gold Heist News: गयाजी रेल थाना क्षेत्र में हुए सनसनीखेज सोना लूटकांड मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसियों ने तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष सहित कुल तीन आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। यह घटना नवंबर 2025 में हुई थी, जब एक ट्रेन यात्री से पूछताछ के बहाने करीब एक किलोग्राम सोना लूट लिया गया था, जिससे रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया था।

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तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष समेत तीन पर गंभीर आरोप

पुलिस द्वारा न्यायालय में प्रस्तुत किए गए आरोप पत्र में तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह, स्वर्ण आभूषण व्यवसायी मोहित अग्रवाल उर्फ मोनू और एक अन्य व्यक्ति परवेज आलम को मुख्य आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसियों का कहना है कि उनके पास उपलब्ध सभी साक्ष्यों और तकनीकी प्रमाणों के आधार पर इन तीनों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित और गहन जांच की है।

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यह मामला इतना चर्चित हुआ कि इसकी जांच पटना रेल पुलिस मुख्यालय के नेतृत्व में गठित एक विशेष टीम को सौंपी गई। इस टीम ने कई स्तरों पर छानबीन की और महत्वपूर्ण तकनीकी एवं भौतिक साक्ष्य एकत्र किए। इस देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें कार्रवाई में पुलिस का लक्ष्य था कि दोषियों को जल्द से जल्द कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए, और अब यह आरोप पत्र उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ट्रेन में पूछताछ के बहाने कैसे हुई सोने की लूट?

यह चौंकाने वाली घटना नवंबर 2025 की है। हावड़ा-बीकानेर-जोधपुर एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे एक यात्री से संदिग्धों ने पूछताछ करने के बहाने लगभग एक किलोग्राम सोना छीन लिया था। इस घटना ने यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। शुरुआत में मामला काफी पेचीदा लग रहा था, लेकिन पुलिस ने इसे चुनौती के रूप में लिया।

घटना के तुरंत बाद रेल थाना कांड संख्या 334/2025 दर्ज किया गया। जांच के दौरान, सहायक अभियोजन पदाधिकारी विजय कुमार ने बताया कि आरोपियों के मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) का गहराई से विश्लेषण किया गया। इस तकनीकी पड़ताल से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए, जिन्होंने पुलिस को मामले की कड़ियों को जोड़ने में काफी मदद की। इन सीडीआर के माध्यम से, यह स्पष्ट हो पाया कि आरोपियों के बीच किस प्रकार का संपर्क था और उन्होंने इस योजना को कैसे अंजाम दिया।

तकनीकी साक्ष्यों और बरामदगी से हुए बड़े खुलासे

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि लूटे गए सोने को स्वर्ण आभूषण व्यवसायी मोहित अग्रवाल ने खरीदा था। जांच दल ने उसके घर पर छापेमारी की, जिसके दौरान लगभग 98 ग्राम सोना बरामद किया गया। यह बरामदगी इस मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा रही है, जो आरोपियों की संलिप्तता की पुष्टि करती है। इसके अतिरिक्त, जांच से यह भी पता चला कि परवेज आलम के प्लांट में ही सोने के बिस्किटों को काटा गया था।

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पुलिस का मानना है कि लूटे गए सोने की पहचान छुपाने और उसे बाजार में खपाने के इरादे से यह कार्रवाई की गई थी। इस पूरे घटनाक्रम ने Bihar Police Action की गंभीरता को दिखाया है, जिसने इतनी बड़ी साजिश का पर्दाफाश किया। यह दर्शाता है कि कानून तोड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उनकी पहचान कुछ भी हो।

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चार अन्य संदिग्धों पर जांच जारी, आगे क्या होगा?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, फिलहाल तीन प्रमुख आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है, लेकिन इस मामले में नामजद या संदिग्ध चार अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी गहन अनुसंधान जारी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। यह दर्शाता है कि पुलिस इस मामले की तह तक जाने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी दोषी को छोड़ने वाली नहीं है।

रेल पुलिस का दावा है कि सभी तकनीकी जांच, बरामदगी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही यह आरोप पत्र तैयार किया गया है और उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। अब इस मामले की सुनवाई अदालत में होगी, जहाँ अभियोजन पक्ष अपने सभी सबूत पेश करेगा और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया है जो न्याय सुनिश्चित करने में सहायक होगी और भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में भी मदद करेगी।

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