Gayaji Medical News: गयाजी स्थित मगध मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में जूनियर डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन आज चौथे दिन भी जारी है। डॉक्टरों की इस अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण सोमवार को अस्पताल की ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) सेवा पूरी तरह से बंद रही। नतीजतन, इलाज के लिए पहुंचे सैकड़ों मरीजों और उनके परिजनों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सुबह से ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। कई मरीज और उनके तीमारदार उचित इलाज न मिलने के कारण इधर-उधर भटकते देखे गए। यह स्थिति आम जनता के लिए बेहद चिंताजनक बन गई है, क्योंकि उन्हें बिना उपचार के ही वापस लौटना पड़ रहा है।




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जूनियर डॉक्टरों की क्या हैं मुख्य मांगें?
आंदोलनरत जूनियर डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगें पूरी होने तक ओपीडी सेवाएं फिर से शुरू नहीं करेंगे। उनकी प्रमुख मांगों में हॉस्टल, अस्पताल की सड़कों और मेस से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान शामिल है। डॉक्टरों का आरोप है कि उन्हें हर बार केवल कोरा आश्वासन दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकलता।
जूनियर डॉक्टरों ने इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया है। उनका कहना है कि वे इस बार केवल आश्वासनों पर भरोसा नहीं करेंगे। डॉक्टरों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर वास्तविक और ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कॉलेज और अस्पताल प्रशासन पर वर्षों से बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
हालांकि, रविवार देर शाम को कॉलेज प्राचार्य के साथ हुई बातचीत के बाद 28 घंटे से ठप पड़ी इमरजेंसी सेवा को फिर से चालू कर दिया गया। इसके बावजूद, ओपीडी सेवाएं अभी तक बहाल नहीं हो सकी हैं, जिससे सामान्य मरीजों की परेशानी जस की तस बनी हुई है।
मरीजों का फूटा गुस्सा, अस्पताल में हड़कंप
लगातार चौथे दिन ओपीडी सेवाएं बंद रहने से मरीजों और उनके परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। नाराज मरीजों ने अस्पताल अधीक्षक कार्यालय का घेराव कर जमकर हंगामा किया। उनका कहना था कि वे इलाज के लिए घंटों से भटक रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मगध मेडिकल थाना पुलिस और कई पुलिसकर्मियों को मौके पर तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों ने मरीजों और उनके परिजनों को शांत करने का प्रयास किया ताकि अस्पताल परिसर में शांति व्यवस्था बनी रहे। इस तरह के Bihar Doctor Strike से आम जनता को सबसे ज्यादा भुगतना पड़ता है।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार अग्रवाल ने बताया कि रविवार रात को हुई बातचीत के बाद स्थिति सामान्य लगने लगी थी, लेकिन सोमवार सुबह जूनियर डॉक्टरों ने ओपीडी रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पहुंचकर सेवाएं शुरू नहीं होने दीं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन लगातार इस समस्या का समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है।
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मगध प्रमंडल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में लगातार चार दिनों से ओपीडी सेवा ठप रहने से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मरीजों का कहना है कि डॉक्टरों और प्रशासन के बीच की इस खींचतान का सबसे बड़ा खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। फिलहाल, मरीजों और उनके परिजनों की निगाहें प्रशासन और जूनियर डॉक्टरों के बीच होने वाली अगली वार्ता पर टिकी हैं।
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जब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक हजारों मरीजों की मुश्किलें बढ़ती रहने की आशंका है। यह घटना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को उजागर करती है और तत्काल ध्यान देने की मांग करती है।







