
Gaya Pinddaan: बिहार के गयाजी में इन दिनों आस्था का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है, जहां देश-दुनिया से श्रद्धालु अपने पितरों की शांति के लिए जुट रहे हैं। फल्गु नदी के तट पर स्थित देवघाट ने एक ऐसा दृश्य देखा, जो शायद ही पहले कभी हुआ हो। यह अद्भुत नजारा न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय भाईचारे का भी संदेश देता है।दुनिया के 40 विभिन्न देशों से आए लगभग 76 विदेशी श्रद्धालुओं ने सनातन परंपरा के अनुसार पिंडदान कर्मकांड संपन्न किया। इन श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पूरी विधि-विधान से अनुष्ठान किए। स्थानीय पंडा छोटू बारिक ने बताया कि यह पहला मौका है, जब इतनी बड़ी संख्या में विदेशी भक्त सनातन धर्म में अपनी गहरी आस्था दिखाते हुए गया पहुंचे हैं और उन्होंने पारंपरिक तरीके से पिंडदान किया है।
अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता का प्रतीक बना गया पिंडदान
सबसे खास बात यह रही कि इन विदेशी श्रद्धालुओं ने न केवल अपने पूर्वजों के लिए, बल्कि अमेरिका-ईरान युद्ध में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए भी विशेष कर्मकांड किया। यह अपने आप में एक मिसाल है, जो यह दर्शाता है कि धार्मिक आस्था की कोई सरहद नहीं होती। अमेरिका, फ्रांस, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन और रूस जैसे देशों से आए श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने गया की धार्मिक महत्ता को वैश्विक पटल पर और भी मजबूत किया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
गया का वैश्विक महत्व और धार्मिक आस्था
इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गया पितृों के लिए मोक्ष प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। सामूहिक रूप से किए गए इस पिंडदान ने न सिर्फ धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय भाईचारे का भी संदेश दिया। यह अद्भुत नजारा गया की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को और भी प्रगाढ़ बनाता है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु पितृ मोक्ष की कामना लेकर आते हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।इस तरह के आयोजन वैश्विक सद्भाव और सनातन परंपरा की गहराई को उजागर करते हैं। Gaya Pinddaan का यह अनोखा संगम विश्वभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे और भी महत्वपूर्ण समाचारों के लिए जुड़े रहें। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंदेश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें






