
बिहार ब्रिज: बिहार में पुलों की सुरक्षा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. हाल ही में भागलपुर के विक्रमशिला सेतु में समस्या के बाद, अब गोपालगंज में गंडक नदी पर बने जादोपुर-मंगलपुर महासेतु में बड़ी खामी सामने आई है. पुल के दो खंभों के बीच 7 इंच का गैप आने से स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं.
महासेतु में गंभीर खराबी: भारी वाहनों पर रोक
गोपालगंज को बेतिया से जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण पुल के पांचवें पिलर के पास स्पैन में करीब 5 से 7 इंच का गैप पाया गया है. इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर, प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पुल से भारी वाहनों के गुजरने पर रोक लगा दी है. हालांकि, छोटे और हल्के वाहनों का परिचालन अभी भी जारी है. अधिकारियों का कहना है कि भारी वाहनों के लगातार दबाव से पुल को और अधिक नुकसान हो सकता है, जिससे किसी बड़े हादसे का खतरा पैदा हो सकता. आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
यह गोपालगंज पुल 2015 में निर्मित हुआ था, जिसमें लगभग 550 करोड़ रुपये की लागत आई थी. करीब 1.92 किलोमीटर लंबा यह महासेतु गोपालगंज और पश्चिम चंपारण जिले के निवासियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं. इस पुल के निर्माण से गोपालगंज और बेतिया के बीच की दूरी लगभग 110 किलोमीटर कम हो गई थी.
जांच और मरम्मत की तैयारी
पुल में गैप की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया. जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा, एसडीएम अनिल कुमार और जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पुल की स्थिति का निरीक्षण किया. सुरक्षा व्यवस्था की भी विस्तृत समीक्षा की गई. डीएम ने बताया कि पुल की मौजूदा स्थिति को लेकर पटना स्थित आईआईटी और एनआईटी की विशेषज्ञ टीम को रिपोर्ट भेजी गई है. जल्द ही विशेषज्ञ मौके पर पहुंचकर तकनीकी जांच करेंगे और उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई और मरम्मत का फैसला लिया जाएगा. आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
बिहार ब्रिज की सुरक्षा पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर बिहार में पुलों के निर्माण और उनकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह घटना बिहार में पुलों के निर्माण और उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठाती है, खासकर जब बिहार ब्रिज परियोजनाओं की बात आती है. बीते कुछ समय से राज्य में पुलों से जुड़ी कई समस्याएं सामने आ रही हैं, जिससे आम जनता में डर का माहौल है. प्रशासन को इन मामलों पर तुरंत ध्यान देने और दीर्घकालिक समाधान खोजने की जरूरत है.






