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Gopalganj Sugar Mill News: गोपालगंज की इस चीनी मिल को स्क्रैप में काटने का कड़ा विरोध! हजारों किसानों ने किया बड़ा ऐलान

गोपालगंज के सासामुसा चीनी मिल की मशीनों को स्क्रैप में काटे जाने के फैसले के खिलाफ सैकड़ों किसान और मजदूर एकजुट हुए। उनका आरोप है कि बकाया भुगतान के बिना यह कदम अन्यायपूर्ण है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।

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Gopalganj Sugar Mill News: जिले के सासामुसा चीनी मिल परिसर में सोमवार को एक महत्वपूर्ण पंचायत का आयोजन किया गया। इस बैठक में बड़ी संख्या में किसान और मजदूर शामिल हुए, जिन्होंने चीनी मिल की मशीनों को कबाड़ में काटने के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। सैकड़ों की संख्या में मौजूद किसानों और श्रमिकों ने मिलकर यह स्पष्ट कर दिया कि वे फैक्ट्री की मशीनों को स्क्रैप के तौर पर काटे जाने की प्रक्रिया को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। किसानों और मजदूरों ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक उनके वर्षों से लंबित बकाया का पूरा भुगतान नहीं हो जाता, तब तक मिल को कबाड़ में बदलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह उनका हक है और वे इसे लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

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एनसीएलटी की नीलामी के बाद बढ़ा विवाद

किसान संघर्ष समिति के नेताओं ने बताया कि सासामुसा चीनी मिल से जुड़ा यह विवाद राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) द्वारा नवंबर 2025 में इसकी नीलामी किए जाने के बाद सामने आया है। नीलामी प्रक्रिया के बाद जिस एजेंसी ने मिल का अधिग्रहण किया है, वह अब फैक्ट्री की मशीनों को स्क्रैप या कबाड़ के तौर पर बेचने की तैयारी में जुट गई है। इस कदम ने हजारों किसानों और मजदूरों को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। यही कारण है कि अपने अधिकारों और आजीविका की रक्षा के लिए किसानों तथा मजदूरों ने एकजुट होकर आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

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पंचायत में सर्वसम्मति से यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि 21 जून को सासामुसा चीनी मिल के मुख्य गेट पर एक विशाल महाधरना आयोजित किया जाएगा। इस धरना प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसानों और श्रमिकों के भाग लेने की उम्मीद है। इस आगामी प्रदर्शन के संबंध में जिला प्रशासन और जिलाधिकारी को विधिवत सूचित कर दिया गया है। किसानों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी जायज मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया और उन्हें अनसुना किया गया, तो यह आंदोलन और भी अधिक तीव्र रूप धारण कर सकता है।

किसानों का दावा है कि सासामुसा चीनी मिल पर गन्ना किसानों और मिल मजदूरों का करोड़ों रुपये का भारी-भरकम बकाया है, जिसका भुगतान वर्षों से नहीं किया गया है। उनका तर्क है कि जब तक यह सभी देनदारियां पूरी तरह से चुकाई नहीं जातीं, तब तक फैक्ट्री की मशीनों को कबाड़ में बदलना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और गैर-नैतिक कदम होगा। किसानों ने यह भी बताया कि राज्य सरकार फैक्ट्री को बचाने और इसे फिर से चालू करने की दिशा में लगातार पहल कर रही है। ऐसे में मिल की मशीनों को नष्ट करना न केवल आर्थिक रूप से गलत है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के हित के खिलाफ होगा।

सरकार की पहल और किसानों की उम्मीदें

पंचायत में उपस्थित किसानों ने Bihar Sugar Industry News के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा सासामुसा चीनी मिल को फिर से सक्रिय करने और पुनर्जीवित करने के प्रयासों का गर्मजोशी से स्वागत किया है। उनका मानना है कि यदि किसी नए निवेशक के माध्यम से यह चीनी मिल दोबारा चलना शुरू हो जाती है, तो इससे क्षेत्र के हजारों गन्ना किसानों और मजदूरों को सीधा और महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ मिलेगा। किसानों ने इस बात पर जोर दिया कि सासामुसा चीनी मिल सिर्फ एक औद्योगिक इकाई नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के लगभग 24 हजार गन्ना किसानों की आजीविका का मुख्य आधार रही है। उनका मानना है कि यदि यहां नए निवेशकों को आकर्षित कर उन्हें मिल चलाने का मौका दिया जाता है, तो इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी, बल्कि हजारों नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

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किसानों के बढ़ते आंदोलन के बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। राज्य सरकार ने किसानों के बकाया भुगतान को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। आठ जून को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में गन्ना उद्योग विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इसके तहत सासामुसा शुगर वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड के गन्ना किसानों का कुल 42 करोड़ 99 लाख 9 हजार 95 रुपये का बकाया भुगतान स्वीकृत कर दिया गया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि चीनी मिल के पुनः संचालन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए किसानों का यह बकाया भुगतान प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा। राज्य कैबिनेट द्वारा बकाया भुगतान की मंजूरी मिलने के बाद अब सासामुसा चीनी मिल के लिए नए निवेशक के आने का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है। इससे मिल को पुनर्जीवित करने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। किसानों को अब यह उम्मीद है कि जिस तरह रिगा चीनी मिल को फिर से चालू किया गया था, उसी तर्ज पर सासामुसा चीनी मिल को भी दोबारा शुरू किया जा सकेगा। इससे वर्षों से बंद पड़े इस महत्वपूर्ण उद्योग में नई जान फूंकी जा सकेगी।

सासामुसा चीनी मिल का दर्दनाक इतिहास और वर्तमान

वर्ष 1932 में स्थापित हुई सासामुसा चीनी मिल कभी पूरे इलाके की आर्थिक रीढ़ और धुरी मानी जाती थी। यह मिल स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ थी। अपने सुनहरे दिनों में इस मिल में लगभग 960 मौसमी मजदूर और 438 स्थायी कर्मचारी कार्यरत थे, जिन्हें इससे नियमित आय प्राप्त होती थी। मिल के सुचारु संचालन से हजारों की संख्या में किसान सीधे जुड़े हुए थे, जिनके लिए गन्ना उत्पादन और उसकी बिक्री आय का मुख्य स्रोत थी। हालांकि, 20 दिसंबर 2017 की रात को मिल में हुए एक भीषण बॉयलर हादसे ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया था। यह दर्दनाक घटना मिल के इतिहास में एक काला अध्याय बन गई। बॉयलर का पाइप फटने से हुए जबरदस्त विस्फोट में नौ मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिसने हजारों परिवारों को प्रभावित किया। इस भयावह हादसे के बाद से मिल की स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और आखिरकार इसका उत्पादन पूरी तरह से ठप हो गया।

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इस महत्वपूर्ण पंचायत को संबोधित करने वाले प्रमुख नेताओं में जदयू प्रखंड अध्यक्ष मो. तौहीद, किसान संघर्ष समिति के संयोजक सत्येंद्र बैठा, सुनील यादव, योगेंद्र शर्मा, गुड्डू प्रसाद, ओमप्रकाश प्रसाद, अजय प्रसाद गुप्ता और चीनी मिल लेबर यूनियन के प्रतिनिधि एम. मतीन शामिल थे। सभी वक्ताओं ने किसानों और मजदूरों से एकजुट होकर आगामी 21 जून को होने वाले महाधरना को सफल बनाने का भावुक आह्वान किया। किसानों ने अपने अंतिम संदेश में स्पष्ट किया कि सासामुसा चीनी मिल उनके लिए केवल एक फैक्ट्री नहीं है, बल्कि यह हजारों परिवारों की आजीविका का साधन और इस पूरे क्षेत्र की गौरवपूर्ण पहचान है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि जब तक उनके बकाया का भुगतान नहीं हो जाता और मिल फिर से चालू नहीं हो जाती, तब तक उनका यह संघर्ष बिना रुके जारी रहेगा।

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