Jamui Pul News: बिहार के जमुई जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। चकाई प्रखंड में देवघर एम्स को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण अजय नदी पुल में एक बड़ी और खतरनाक दरार आ गई है। इस दरार के कारण पुल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों और वाहन चालकों में बड़े हादसे का डर सता रहा है। यह पुल कई गांवों के लिए जीवनरेखा माना जाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कियाजोड़ी- पांडेडीह- फरियताडीह मार्ग पर स्थित यह पुल देवघर AIIMS तक पहुंचने का एक मुख्य और व्यस्त रास्ता है। पुल के पहले ही स्लैब में आई दरार समय के साथ लगातार चौड़ी होती जा रही है, जो स्पष्ट रूप से पुल की कमजोर होती संरचना की ओर इशारा करती है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह दरार इतनी भयावह दिख रही है कि इसे देखकर किसी भी बड़े खतरे का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। लोग रोज इस पुल से गुजरते हुए सहमे हुए हैं।
ग्रामीणों में दहशत और अधिकारियों की कथित अनदेखी
अजय नदी पुल में आई इस डरावनी दरार से जमुई के लगभग 12 गांवों के लोग बुरी तरह सहमे हुए हैं। उन्हें यह आशंका सता रही है कि यदि आगामी मानसून की भारी बारिश से पहले इसकी तत्काल मरम्मत नहीं हुई, तो यह पुल कभी भी भरभराकर नदी में समा सकता है। स्थानीय निवासियों ने कई बार स्थानीय प्रशासन और पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों से इस समस्या के समाधान के लिए गुहार लगाई है, लेकिन उनकी मांगों को कथित तौर पर अनसुना किया जा रहा है।
एक स्थानीय निवासी रमेश सिंह ने बताया कि यह पुल उनके लिए सिर्फ एक ढांचा नहीं, बल्कि जीवनरेखा समान है। देवघर एम्स तक पहुंचने के लिए यही एकमात्र सुगम रास्ता है, विशेषकर आपातकालीन स्थितियों में। लेकिन, अब इस जर्जर पुल पर चलना भी खतरे से खाली नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पुल की दयनीय हालत देखकर वाहन चालक भी थर-थर कांप रहे हैं और जान जोखिम में डालकर मजबूरी में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
हजारों लोगों का जीवन और अहम संपर्क खतरे में
इस महत्वपूर्ण पुल के ढह जाने से न केवल संबंधित 12 गांवों का प्रखंड मुख्यालय और अन्य शहरों से संपर्क टूट जाएगा, बल्कि हजारों मरीजों और आम लोगों को देवघर AIIMS तक पहुंचने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। स्कूल जाने वाले बच्चों को भी हर रोज मुश्किलों से जूझना पड़ेगा। यह स्थिति निश्चित रूप से क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक जीवन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, जिससे विकास की गति धीमी पड़ सकती है।
बिहार में पुलों की ऐसी खराब स्थिति एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है, खासकर जब राज्य में बुनियादी ढाँचे के विकास पर जोर दिया जा रहा है। पिछले कुछ समय में सामने आए कई देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें ‘बिहार ब्रिज कोलैप्स’ (Bihar Bridge Collapse) की घटनाओं के मद्देनजर इस अजय नदी पुल की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन को इन पूर्व की घटनाओं से सबक लेते हुए अजय नदी पुल की स्थिति पर तुरंत ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि कोई बड़ा और दुखद हादसा न हो सके।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले में राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका स्पष्ट कहना है कि जनहित में इस पुल की तत्काल मरम्मत कराना अत्यंत आवश्यक है और इसमें किसी भी प्रकार की देरी हजारों लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। यदि समय रहते इस गंभीर खतरे पर ध्यान नहीं दिया गया, तो एक बड़ी जनहानि की आशंका से बिल्कुल इनकार नहीं किया जा सकता है।
आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
अधिकारियों की ओर से बताया गया है कि वे इस संवेदनशील मामले से पूरी तरह अवगत हैं और जल्द ही पुल के विस्तृत निरीक्षण के लिए एक विशेषज्ञ टीम भेजी जाएगी। हालांकि, ग्रामीण इस तरह के सामान्य आश्वासनों से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं और वे तत्काल, ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस गंभीर खतरे को कितनी गंभीरता से लेता है और समय रहते कोई प्रभावी समाधान निकाल पाता है या नहीं, क्योंकि लोगों की जान दांव पर लगी हुई है।







