जमुई ट्रांसफार्मर न्यूज़: जमुई के मांगोबंदर बाजार में एक 200 केवीए का ट्रांसफार्मर अब एक परिवार के लिए मौत का खतरा बन गया है। यह ट्रांसफार्मर एक घर और दुकान के ठीक सामने लगा है, जिससे हर पल दुर्घटना का डर बना रहता है। पीड़ित परिवार ने इस जानलेवा स्थिति से मुक्ति पाने के लिए मुख्यमंत्री और केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय तक गुहार लगाई है, जिसके बाद हड़कंप मच गया है।
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जानलेवा ट्रांसफार्मर: दहशत में जी रहा है परिवार
स्थानीय निवासी केदारनाथ विश्वकर्मा ने बताया कि उनके घर और दुकान के ठीक सामने लगा यह 200 केवीए का ट्रांसफार्मर लगातार जानलेवा साबित हो रहा है। इसकी असुरक्षित स्थिति के कारण उनके परिवार के सदस्य हर पल खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह ट्रांसफार्मर उनके लिए मुसीबत का सबब बन गया है, जो कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।
केदारनाथ विश्वकर्मा ने यह भी बताया कि इस ट्रांसफार्मर की चपेट में आने से उनके परिवार के सदस्य पहले भी गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। इन हादसों के कारण उन्हें शारीरिक कष्ट के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा है। बावजूद इसके, अब तक विभाग या स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि ट्रांसफार्मर से निकलने वाली चिंगारियां और कभी-कभी होने वाला स्पार्किंग उनके घर और दुकान के लिए सीधा खतरा है। विशेषकर बरसात के मौसम में यह खतरा और भी बढ़ जाता है। इस स्थिति ने न केवल उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया है, बल्कि उन्हें लगातार मानसिक तनाव भी दे रहा है।
प्रभावशाली धमकियां और प्रशासनिक उदासीनता का आरोप
केदारनाथ विश्वकर्मा का आरोप है कि जब उन्होंने इस खतरनाक ट्रांसफार्मर को हटाने के लिए अधिकारियों से शिकायत की, तो कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों द्वारा उन्हें धमकाया जाने लगा। इन धमकियों के बावजूद, उन्होंने अपनी लड़ाई जारी रखी और न्याय की उम्मीद में उच्च अधिकारियों तक पहुंचने का फैसला किया। यह घटना स्थानीय स्तर पर सत्ता और प्रभाव के दुरुपयोग की ओर भी इशारा करती है।
पीड़ित का यह भी कहना है कि उनकी शिकायतों के बावजूद विभागीय स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस उदासीनता के कारण स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
यह स्थिति केवल मांगोबंदर बाजार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बिहार पावर न्यूज़ के अंतर्गत राज्य के अन्य हिस्सों से भी ऐसी शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं। सुरक्षा मानकों का पालन न करना और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई न करना, बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
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मुख्यमंत्री और केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय से न्याय की गुहार
अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा तथा न्याय की मांग को लेकर केदारनाथ विश्वकर्मा ने कई उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को आवेदन सौंपा है। उन्होंने मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, जमुई जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, बीडीओ, सीओ और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी के समक्ष अपनी पीड़ा रखी है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय तक भी अपनी शिकायत पहुंचाई है, ताकि इस गंभीर मामले में उच्च स्तरीय हस्तक्षेप हो सके।
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला वर्तमान में ‘जन शिकायत पोर्टल’ पर दर्ज है और केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के स्तर पर भी विचाराधीन है। पीड़ित ने विशेष रूप से जनप्रतिनिधियों और संबंधित वरीय अधिकारियों से तत्काल स्थल निरीक्षण करने की पुरजोर मांग की है। उनका आग्रह है कि इस जानलेवा ट्रांसफार्मर को जल्द से जल्द किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
केदारनाथ विश्वकर्मा का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य भविष्य में किसी भी बड़ी दुर्घटना को टालना है, जिससे किसी की जान या संपत्ति का नुकसान न हो। उन्होंने उम्मीद जताई है कि सरकार और प्रशासन उनकी गुहार पर गंभीरता से विचार करेगा और उन्हें इस लगातार मंडरा रहे खतरे से मुक्ति दिलाएगा।
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इस घटना ने एक बार फिर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर व्यापक सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन जल्द ही इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देगा और मांगोबंदर बाजार के निवासियों को इस लगातार मंडरा रहे खतरे से मुक्ति दिलाकर सुरक्षित वातावरण प्रदान करेगा। यह मामला एक बड़ा सबक भी है कि सार्वजनिक स्थानों पर बिजली उपकरणों की स्थापना और रखरखाव में कितनी सावधानी बरतनी चाहिए।







